नई दिल्ली। दक्षिणी निगम के महापौर मुकेश सूर्यान ने आप पार्टी के उन आरोपों का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि निगम ने टोल एकत्रित करने वाली एजेंसी को 93 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी निगम ने टोल वसूली की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आरएफआईडी आधारित व्यवस्था अपनाई है।
महापौर ने जानकारी दी कि दिल्ली में टोल प्लाजा का संचालन करने के लिए चुनी हुई एजेंसी के साथ 10 अप्रैल 2021 को अनुबंध किया गया था। इसके बाद दिल्ली में कोरोना के बढ़ने के कारण दिल्ली सरकार द्वारा 10 अप्रैल 2021 से रात्रि कर्फ्यू व 17 अप्रैल 2021 से संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया था, जो 13 जून 2021 तक प्रभावी था।
दिल्ली सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित किया है, जिसके आधार पर टोल संग्राहक एजेंसी को भी राहत मिली है। निगम द्वारा किए गए अनुबंध के अनुच्छेद 15 के अंतर्गत कोरोना महामारी को एक अप्रत्याशित घटना माना गया है। इसके चलते टोल संग्राहक एजेंसी निगम को तय राशि से कम भुगतान कर सकती है। निगम ने टोल संग्राहक एजेंसी को 13 आरएफआईडी टोल प्लाजा पर प्राप्त राजस्व के आधार पर राहत दी है।
महापौर ने साफ किया कि टोल एजेंसी को 13 जून 2021 तक राहत दी गई थी। निगम के टोल टैक्स विभाग के पास इन सभी 13 आरएफआईडी टोल नाकों की वीडियो उपलब्ध हैं। दिल्ली की जनता अच्छी तरह जानती है कि अप्रैल, मई, जून 2021 में दिल्ली लॉकडाउन के कारण ठहर गई थी। सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद थे, व्यवसायिक वाहनों की आवाजाही बंद थी।
सूर्यान ने कहा कि भारत में सबसे अधिक टोल प्लाजा का संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा किया जाता है, उसके द्वारा भी इसी तर्ज पर राहत प्रदान की गई है।