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फंड के लिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर बैठे तीनों महापौर, देर रात सत्येंद्र जैन ने कराया समाप्त

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सीएम आवास पर दिन भर धरने के बाद रात को स्वास्थ्य मंत्री से मिले महापौर का धरना
- सत्येद्र जैन ने कहा कि एमसीडी अपने कर्मियों को लेकर गंभीर नहीं, केंद्र पर निगम का 12 हजार करोड़ बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के तीनों महापौरों ने नगर निगम की बकाया राशि के भुगतान के लिए सोमवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। महापौर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलना चाहते थे लेकिन अरविंद केजरीवाल से मुलाकात नहीं हो सकी। इसी बीच दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने उनको मुलाकात के लिए बुलाया, लेकिन मेयर शाम तक मुख्यमंत्री आवास के सामने ही बैठे रहे। हालांकि वह रात आठ बजे उनसे मुलाकात करने पहुंचे। इस बैठक में जैन ने समस्या का उचित समाधान निकालने का भरोसा दिया। उसके बाद ही महापौरों ने धरना खत्म किया।
सत्येंद्र जैन ने बताया कि केंद्र सरकार देश के सभी नगर निगमों को हर साल प्रति व्यक्ति 468 रुपये देती है। लेकिन दिल्ली नगर निगम को केंद्र सरकार से पिछले 10 साल से कुछ भी नहीं मिला है। पिछले 10 साल का केंद्र सरकार पर करीब 12000 करोड रुपये दिल्ली नगर निगम के बनते हैं।
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उन्होंने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम केंद्र सरकार से अपने बकाया पैसे मांगे, वो जरूर दे देंगे लेकिन निगम की दिलचस्पी केंद्र सरकार से पैसे मांगने में नहीं है। इन्हें केवल राजनीति करनी है। दिल्ली सरकार का एमसीडी पर 6 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। अगर यह कह रहे हैं कि इनका दिल्ली सरकार पर कुछ भी बकाया है तो उसे दे देंगे। लेकिन एमसीडी के ऊपर दिल्ली सरकार बकाया है, उस लोन का भी मुद्दा है।
दूसरी तरफ उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जयप्रकाश ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने शाम को मुलाकात कर 10 दिन के अंदर निगमों का बकाया जारी करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद हमने धरने को वापस ले लिया है।
हालांकि इससे पहले सत्येंद्र जैन ने धरने को भाजपा की राजनीति करार दिया था। उनका कहना था कि उन्होंने डॉक्टरों के वेतन मुद्दे पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आदेश पर दोपहर 2 बजे महापौर की बैठक बुलाई थी। लेकिन पूरा दिन गुजर जाने के बाद भी मीटिंग में कोई नहीं आया। एमसीडी अगर डॉक्टरों के वेतन मुद्दे को लेकर गंभीर होती, तो वो बात करती।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार सभी नगर निगम को प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसा देती है। उसे दिल्ली के नगर निगमों को भी पैसा देना चाहिए। दिल्ली के महापौरों को चाहिए कि वो केंद्र सरकार से पैसा मांगें। एमसीडी पर दिल्ली सरकार का हजारों करोड़ बकाया है। जिसे एमसीडी को चुकाना चाहिए। एमसीडी दिल्ली में होर्डिंग्स और पोस्टर्स पर मोटा पैसा खर्च करती है। उसका सारा पैसा भ्रष्टाचार में खत्म होता है। अपना काम सही से नहीं करती और दिल्ली सरकार से पैसा मांगती है। एमसीडी का सिस्टम यदि ठीक नहीं हो रहा है तो इसे दिल्ली सरकार के हवाले कर दिया जाये।
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दिल्ली सरकार पर बरसे महापौर
पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने बताया कि दिल्ली के तीनों नगर निगम आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। दिल्ली सरकार के पास पूर्वी दिल्ली नगर निगम का 2,985 करोड़ रुपये बकाया है। वर्तमान दो तिमाही का 956 करोड़ रुपये का बकाया और बढ़ गया है। इस दौरान उत्तरी दिल्ली के महापौर जय प्रकाश, दक्षिणी दिल्ली की महापौर अनामिका मिथिलेश भी मौजूद थीं।
तीनों महापौर ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री उनसे मुलाकात नहीं करेंगे तब तक वहीं बैठे रहेंगे। दिल्ली सरकार आगामी निगम चुनाव को ध्यान में रख राजनीति कर रही है। दिल्ली सरकार द्वारा फंड जारी नहीं करने के कारण दिल्ली के सारे विकास कार्य रुक गए हैं। दिल्ली सरकार जानबूझकर निगमों को बकाया फंड न देकर इन्हें पंगु बनाना चाहती है ताकि आगामी निगम चुनाव में वह इसका फायदा ले सकें।
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दक्षिणी दिल्ली की महापौर अनामिका ने बताया कि बकाया फंड के लिए मुख्यमंत्री को कई बार पत्र लिखा। उनसे मिलने का समय मांगा लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। इसलिए उनके पास धरना प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हालांकि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के महापौरों से मिलने की चर्चा थी। लेकिन देर शाम तक वह मिलने नहीं पहुंचे थे।
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