मौसम में बदलाव और बढ़ते प्रदूषण के कारण कई लोगों को खांसी और जुकाम की शिकायत हो रही है। ऐसे में लोग इसे कोविड समझ घबरा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में यह समस्याएं आम हैं। इनसे घबराना नहीं चाहिए। लोगों को कोरोना व सामान्य फ्लू के लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए। दोनों के लक्षणों में फर्क हैं। जिसकी पहचान से यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति कोरोना से पीड़ित है अथवा फ्लू से। ऐसे समझे अंतर।
सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि कोरोना वायरस और सामान्य फ्लू के लक्षणों में मामूली अंतर है। अगर व्यक्ति को लगातार सूखी खांसी आ रही है। सांस लेने में दिक्कत और गले में खराश की समस्या होती है। साथ ही तेज बुखार है तो यह कोरोना के लक्षण हैं। वहीं, फ्लू में नाक बहना, बुखार का उतरना और चढ़ना व हल्की खांसी आती है। फ्लू बहती नाक से शुरू होता है, इसके बाद खांसी और बुखार होता है। कोरोना वायरस से संक्रमित बहुत कम लोगों ने खांसी के साथ एक बहती हुई नाक होने की सूचना दी है।
अगर बाहरी एक्सपोजर नहीं है तो कोरोना नहीं फ्लू ही होगा
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर यश गुलाटी बताते हैं कि कोरोना के लक्षण ज्यादातर गले ओर सीने से जुड़े होते हैं। इसमें डायरिया भी हो सकता है। फ्लू में ज्यादातर लक्षण नाक से जुड़े होते हैं। इसमें खासी के साथ बलगम आ सकता है। अगर आपका कोई बाहरी एक्सपोजर( किसी बीमार व्यक्ति से संपर्क) नहीं है तो फ्लू ही होगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति में सूखी खांसी, तेज बुखार और सांस फूलना ये लक्षण एक साथ आए हैं तो यह कोरोनावायरस के लक्षणों के रूप में पहचाने जा सकते हैं। कोरोनावायरस में हमेशा ये लक्षण शामिल होते हैं। इन लक्षणों में से 80% हल्के होते हैं।
घबराने की नहीं है जरूरत
डॉ. गुलाटी के मुताबिक, मौसम में बदलाव के कारण फ्लू के लक्षण काफी आम हैं। हल्के फ्लू के लक्षण उभरने पर घबराना नहीं चाहिए। कोई व्यक्ति सांस लेने में तकलीफ और अन्य सांस की समस्याओं का सामना कर रहा है,लेकिन उसे बुखार नहीं है तो कोरोनोवायरस की जांच करवाने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योकि यह प्रदूषण बढ़ने के कारण भी हो सकता है।