दिल्ली की सड़कों पर लोगों को सुरक्षित सफर का मौका देने के लिए सभी जरूरी बदलाव किए जाएंगे। अभी भी ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदकों को स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर ड्राइविंग के मुश्किल चरणों से गुजरना पड़ता है। ड्राइविंग लाइसेंस पाने की प्रक्रिया की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों ड्राइविंग लाइसेंस के लिए हुए टेस्ट में 30 फीसदी से अधिक आवेदक फेल हो गए।
इससे पता चलता है कि वाहन चलाने में दक्ष चालकों के ही लाइसेंस बन सकेंगे। इससे भी दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने सड़क सुरक्षा पर आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि एजेंसियों और संस्थाओं के विशेषज्ञों के सहयोग से सड़कों के डिजाइन में बदलाव किए जाएंगे ताकि सड़कों पर लोगों को सफर करते समय सुरक्षित होने का एहसास हो। इसी को ध्यान में रखते हुए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया काफी कठिन रखी गई है।
परिवहन मंत्री ने कहा कि किसी भी दुर्घटना के कारणों के विश्लेषण के लिए परिवहन विभाग की टीम भी मौके का जायजा लेगी। दुर्घटना के कारणों को जानने के बाद जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे ताकि सड़कों पर लोगों को सुरक्षित सफर का मौका मिल सके। कुछ दिनों पहले सड़क दुर्घटना के लिहाज से चिन्हित ब्लैक स्पॉट खत्म किए गए है। आगे भी जागरूकता अभियान जारी रहेंगे।
बदलाव से हादसे किए जा सकते हैं कम
सड़क हादसों में पिछले साल दिल्ली में 1,196 लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान अलग-अलग दुर्घटनाओं में 3,662 लोग घायल हुए थे। सड़क डिजाइन में बदलाव, यातायात कानूनों के परिवर्तन और सड़क सुरक्षा नीतियों को सुदृढ़ करने पर हादसे कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लोगों को सुरक्षित सफर मुहैया करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस पर काम कर रही है।
50 फीसदी से अधिक हादसे तेज रफ्तार के कारण
दिल्ली में आधे से अधिक हादसों के लिए तेज रफ्तार वजह है। एक अप्रैल, 2022 तक जारी इस सोशल मीडिया अभियान के तहत विभाग वाहनों की रफ्तार पर शिकंजा कसने के लिए लोगों को जागरूक करेगा। इस दौरान हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने के लिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। अभियान के प्रति जुड़ाव पैदा करने के लिए विशिष्ट डिजिटल उत्पाद भी लॉन्च किए जाएंगे।