गोकुलपुर गांव में ‘बाबुल’ ने पाई-पाई जोड़कर सुहाग का लाल जोड़ा, चूड़ियां और आभूषण आदि सामान वर्षों में जुटाया था। बिटिया के हाथ पीले करने की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। आसपड़ोस और रिश्तेदारों को शादी का संदेश भेज दिया था। उधर, बिटिया को भी अपने ‘राजकुमार’ का इंतजार था।
खुशियों से सरोबार आंगन में लिपाई-पुताई का काम चल रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। चंद लम्हों में खुशियों के साथ आंगन भी मिट गया और शादी के लिए जुटाया गया सामान सुहागिन बनने से पहले ही जल गया।
अगले माह तय थी रेशमा की शादी
मृतक परिवार से बबलू की बहन रबीना ने बताया कि बहन रेशमा की शादी अगले माह तय थी। इसे लेकर परिवार बीते तीन-चार माह से तैयारियां में जुटा हुआ था। बहन की शादी गांव में धूमधाम से करने के लिए भाई-बहनों ने पाई-पाई जोड़कर करीब ढाई लाख रुपये का इंतजाम किया था। इसमें से कुछ रुपये के आभूषण व अन्य सामान खरीदकर घर में जमा भी कर लिया था। बाकी का इंतजाम गांव में पहुंचकर करना था। इसके लिए गांव में शादी को लेकर भी अन्य तैयारियां चल रही थीं। बकौल रबीना, रेशमा के लिए खरीदे गए कपड़ों से लेकर आभूषण भी झुग्गी के साथ जल गए।
आरती के लिए पिता ने लगाई जमापूंजी
झुग्गी में रहने वाले पप्पू ने बताया कि उनकी बेटी आरती का विवाह तय कर दिया गया था। अगले एक सप्ताह में ही शहनाइयां बजने वाली थी। इसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली थी और आभूषण व कपड़े भी खरीद लिए थे। आग इतनी तेजी से फैली की सिर्फ जान बचाना ही संभव हो सका। बेटी के लिए तैयार शादी का जोड़ा, अन्य कपड़े और आभूषण आग की लपटों में जल गए। पप्पू के मुताबिक, बेटी के लिए सालभर से पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली थीं, परंतु एक झटके में ही सब कुछ खत्म हो गया। अब बेटी के हाथों की मेहंदी रचाने का भी इंतजाम नहीं है।
रोशनी के जीवन में छाया अंधेरा
झुग्गी में रहने वाली एक अन्य महिला ज्योति ने बताया कि उनकी बेटी रोशनी की शादी अगले दो माह में होनी थी। इसे लेकर झुग्गी में रहने वाले अन्य लोगों के सहयोग से शादी का सामान इकट्ठा किया था। अगले माह उन्नाव स्थित गांव जाकर तैयारियां करने की योजना थी। बेटी की शादी को लेकर बहुत उम्मीदें थी, लेकिन अब सारी उम्मीदें आग के साथ जल गई हैं।
सीने पर गुदा है बेटे का नाम
हादसे से पीड़ित पिंटू और रोमा आठ माह पहले हुई अपने बेटे की मौत को भूलते कि उनकी दो संतान और चल बसी। आग ने रोशन और दीपिका को भी उनसे छीन लिया। रोमा और पिंटू भी घायल हैं। पिंटू का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे का नाम अपने सीने पर गुदवा रखा है। पिंटू इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि उनके जिगर का टुकड़ा चला गया है। उनका कहना है कि उनका बेटा आज भी गुदे हुए नाम के साथ सीने में मौजूद है। पिंटू के पिता संतू के मुताबिक, करीब आठ माह पहले ही पोते को कुत्ते ने काट लिया था। संक्रमण बढ़ने से उसकी मौत हो गई थी। रोमा और पिंटू अभी अपने बेटे की मौत को भूला भी नहीं पाए थे कि दुख का पहाड़ फिर से टूट पड़ा।
एक साथ अंतिम संस्कार
हादसे में मृत एक ही परिवार के पांच सदस्यों और अन्य परिवार के दो सदस्यों का पोस्टमार्टम गुरु तेग बहादुर अस्पताल में हुआ। अस्पताल से सात शवों को लेकर शहीद भगत सिंह दल की एंबुलेंस मंडोली चुंगी स्थित शमशान घाट पर पहुंची। शवों को मुखाग्नि देने के लिए परिवार के अलावा अन्य स्थानीय लोग भी पहुंचे। जैसे ही एक ही परिवार के पांच व दूसरे परिवार के दो सदस्यों को मुखाग्नि दी गई तो परिजनों के साथ अन्य लोगों का भी दर्द फूट पड़ा। इस दौरान रो-रोकर कई महिलाएं बेहोश भी हो गईं।
राजधानी में आग की बड़ी घटनाएं
- 13 जून 1997 : ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में आग से 59 मौतें।
- 12 दिसंबर 2017 : निहाल विहार में आग से दो लोगों की मौत।
- 07 जुलाई 2017 : दिलशाद गार्डन क्षेत्र में जन्मदिन पार्टी के दौरान आग से चार की मौत।
- जनवरी 2018 : बवाना स्थित फैक्टरी में आग लगने 17 लोगों की मौत।
- 13 अप्रैल 2018 : कोहाट एंक्लेव की इमारत में आग से चार मौतें।
- 09 अप्रैल 2018 : सुल्तानपुरी स्थित जूता फैक्टरी में आग से चार मौतें।
- 19 नवंबर 2018 : करोल बाग की एक कंपनी में चार मजदूरों की मौत।
- 06 अगस्त 2019 : जाकिर नगर के मकान में आग से छह की मौत।
- 12 फरवरी 2019 : करोल बाग स्थित अर्पित पैलेस होटल में आग से 17 लोगों की मौत।
- 08 दिसंबर 2019 : अनाज मंडी स्थित चार मंजिला इमारत में 43 मौतें।
- 14 दिसंबर 2019 : शालीमार बाग के मकान में आग से तीन मौतें।
- 02 जनवरी 2020 : पीरा गढ़ी स्थित फैक्टरी में एक दमकर्मी की मौत।