अदालत ने 8100 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के आरोपी के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि महज संभावनाओं के आधार पर किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों में सरकार के दखल का समर्थन नहीं किया जा सकता।
राउज एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने ये टिप्पणी गुजरात की कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में की।
अदालत ने ये आदेश सुरेश नंदलाल रोहिरा के आवेदन पर सुनवाई के बाद दिया। रोहिरा ने उसके खिलाफ 2019 में जारी एलओसी वापस लेने का निर्देश प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को देने का आग्रह किया था। उसने कहा था कि ईडी को एलओसी वापस लेने का निर्देश दिया जाए ताकि वह सिंगापुर की कंपनी में नौकरी करने के लिए जा सके।
अदालत ने कहा आवेदन पर जिरह के दौरान ईडी ऐसा कोई भी स्पष्टीकरण देने में नाकाम रहा कि आरोपी के सिंगापुर में नौकरी करने से देश के आर्थिक हितों को नुकसान होगा। अदालत ने कहा कि सरकार जब भी किसी नागरिक के जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार को बाधित करे तो बेहद सावधानी और जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि रोहिरा को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अपनी आजीविका के लिए विदेश जाने का अधिकार है। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि इस मामले की जांच 2017 से लंबित है। वहीं रोहिरा से ईडी कई बार कड़ी पूछताछ कर चुका है। आज तक उसके खिलाफ कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है।