कांग्रेस नेता शशि थरूर ने दावा किया कि उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर के परिवार और दोस्तों ने यह बात कही है कि वह मजबूत महिला थी और आत्महत्या नहीं कर सकती थी। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि उनके खिलाफ उकसाने का गलत मामला दर्ज किया गया है ऐसे में उन्हें इस आरोप से बरी किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल तय की है।
राउज एवेन्यू अदालत की विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल के समक्ष थरूर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि सुनंदा पुष्कर एक मजबूत महिला थी और वह आत्महत्या नहीं कर सकती। उकसाने पर उसके आत्महत्या की संभावना नहीं है। ऐसे में उनके मुवक्किल को मामले से बरी किया जाए। उन्होंने यह तर्क अभियोग तय करने के मुद्दे पर जिरह के दौरान रखा।
विकास पाहवा ने कहा कि सुनंदा के रिश्तेदारों और बेटे का कहना है कि वह एक मजबूत महिला थी और आत्महत्या से नहीं कर सकती। जब वह आत्महत्या नहीं कर सकती तो उकसाने का सवाल कहां उठता है। उन्होंने कहा अभियोजन पक्ष आत्महत्या साबित करने में नाकाम रहा है। अभी तक अभियोजन पक्ष मौत के कारणों का पता नहीं लगा पाया है। मौत के समय सुनंदा कई बीमारियों से पीड़ित थी।
पाहवा ने इससे पहले सुनवाई में कहा था कि पोस्टमार्टम और अन्य मेडिकल रिपोर्टों में यह साबित हो गया है कि यह न तो आत्महत्या थी और न ही हत्या। उन्होंने कहा कि एक भी गवाह ने उनके मुवक्किल के खिलाफ दहेज, उत्पीड़न या क्रूरता के कोई आरोप नहीं लगाए। न ही कभी किसी बात पर सुनंदा को उकसाने का आरोप लगा है। इस मौत को एक दुर्घटना के रूप में लिया जाना चाहिए।
सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी, 2014 की रात एक लग्जरी होटल के कमरे में मृत पाई गई थीं। यह दंपती होटल में इस कारण रह रहा था क्योंकि उनके बंगले में मरम्मत चल रही थी।