हाईकोर्ट ने कहा था कि मंदिर परिसर के इर्दगिर्द अनधिकृत कब्जा करने वाले या दुकानदार जिनके पास कब्जा करने का कोई वैध कानूनी अधिकार (तहबाजारी ली लायसेंस) नहीं है, उन्हें दिल्ली पुलिस और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के समन्वय से हटाया जा सकता है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान महंत सुरेंद्र नाथ (अपीलार्थी) की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने पीठ के समक्ष कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष मामला विवाहित बेटी के पूजा सेवा में हिस्सा लेने व पूजा सेवा करने के अधिकारों के संबंध में था लेकिन हाईकोर्ट ने मामले के दायरे का विस्तार किया और मंदिर को अपने कब्जे में ले लिया। इसे रिसीवर के नीचे रख दिया। धवन ने प्रस्तुत किया कि आदेश के खिलाफ पहली अपील में हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र को पार कर लिया।
उन्होंने कहा कि हमारे पूरे मंदिर पर कब्जा कर लिया गया है। एक पुनर्विकास योजना चल रही है। उन्होंने कहा कि यह अनसुना है कि महंत का मंदिर के प्रबंधन पर अधिकार नहीं है। यह कहते हुए वरिष्ठ वकील धवन ने 27 सितंबर, 2021 के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन पीठ ने उक्त राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि पीठ ने इस नए मामले में नोटिस जारी किया और कहा कि छुट्टियों के बाद सुनवाई होगी।