दिल्ली में करीब डेढ़ माह के बाद शुक्रवार से स्कूलों में एक बार फिर से रौनक लौटेगी। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद एक जुलाई यानी शुक्रवार से स्कूल खुलने जा रहे हैं। जहां सभी सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त व कुछ निजी स्कूल शुक्रवार से खुल जाएंगे जबकि कई अन्य निजी स्कूल चार जुलाई से खुलेंगे। कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद पहली बार तय समय से स्कूल खोले जा रहे हैं। स्कूलों ने भी बच्चों के स्वागत की तैयारी पूरी कर ली है।
दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं, ऐसे में अभिभावकों में बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर डर भी है। हालांकि स्कूल संचालकों का कहना है कि स्कूल खुलने पर पूरी तरह से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करवाया जाएगा। कक्षाओं को सैनिटाइज करने का काम भी हो चुका है। स्कूलों की ओर से पहले ही बच्चों से अवकाश के दौरान दिए गए गृहकार्य को जमा करवा लिया गया है। ब्यूरो
शब्दों की पहचान न कर पाने वाले बच्चे दो माह में पढ़ेंगे किताब : उपमुख्यमंत्री
शब्दों की पहचान न कर पाने वाले सरकारी व एमसीडी स्कूलों के कक्षा तीसरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे दो माह में किताब पढ़ पाएंगे। इसके लिए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूलों में संचालित मिशन बुनियाद कार्यक्रम को दो माह और संचालित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि मिशन बुनियाद ने कोरोना महामारी के कारण आए लर्निंग गैप को दूर करने का काम किया है। इस बार दिल्ली सरकार के स्कूलों के साथ-साथ एमसीडी स्कूलों में भी मिशन बुनियाद कार्यक्रम चलाया गया। इसके शानदार नतीजे सामने आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एमसीडी कमिश्नर ज्ञानेश भारती, शिक्षा सचिव अशोक कुमार एवं शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता सहित शिक्षा विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा कि यदि हमारे शिक्षा विभाग व एमसीडी के स्कूल इस तरह ही साथ मिलकर काम करें तो बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार करने में बड़ी मदद मिलेगी। हमें पूरी दिल्ली के लिए एक न्यूनतम बेंच मार्क स्थापित करने की जरूरत है।