दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक कोर्सेज के लिए दाखिला प्रक्रिया जारी है। इसमें एससी-एसटी, ओबीसी श्रेणी के छात्र सामान्य श्रेणी की सीट पर दाखिला नहीं ले सकते हैं। डीयू की गाइडलाइंस में कहा गया है कि छात्रों ने जिस श्रेणी के तहत आवेदन किया गया होगा उन्हें कॉलेज उसी श्रेणी में दाखिला देगा। ऐसे में दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने कोटे व सामान्य वर्ग के छात्रों के अंक बराबर होने पर कोटे के छात्रों को सामान्य वर्ग में दाखिला दिए जाने की मांग की है।
डीयू केशिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) के अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने इस संबंध में डीयू के कार्यवाहक कुलपति प्रो. हंसराज सुमन को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने मांग की है कि एससी-एसटी और ओबीसी कोटे के छात्रों के सामान्य वर्गों के छात्रों के बराबर अंक होने पर उन्हें सामान्य श्रेणी में दाखिला दिया जाए। उन्होंने बताया है कि प्रशासन द्वारा जारी नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि जिस श्रेणी में छात्रों ने दाखिले के लिए आवेदन किया है उन्हें उसी श्रेणी में कॉलेज दाखिला देगा।
उन्होंने कहा कि गाइडलाइंस में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में श्रेणी परिवर्तन की अनुमति नहीं है। यह भारत के संविधान में प्रदत्त शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के प्रावधानों के विपरीत है। डॉ. हंसराज ने कहा कि गत वर्षों की भांति एससी-एसटी, ओबीसी के छात्रों को सामान्य श्रेणी के छात्रों के बराबर अंक होने पर उन्हें सामान्य श्रेणी में दाखिला दिया जाए।
ओबीसी छात्रों के जाति प्रमाण पत्रों को तीन साल तक की छूट दी जाए
ओबीसी कोटे के छात्रों के दाखिले के समय 31 मार्च 2021 के बाद बने ओबीसी कोटे के जाति प्रमाण पत्रों को ही स्वीकार किया जा रहा है। यदि उनके पास 31 मार्च 2021 के बाद का जाति प्रमाण पत्र नहीं है तो उन छात्रों से कॉलेज शपथ पत्र ले रहा है। उन्होंने पत्र में ओबीसी के छात्रों के जाति प्रमाण पत्रों को तीन साल तक की छूट दिए जाने की मांग की है। क्योंकि कोरोना महामारी के कारण छात्र प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं कर पाए।