नई दिल्ली। संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाया जाना चािहए क्योंकि यह ज्ञान और विज्ञान का विषय है। जहां संस्कृत है वही संस्कृति है। यह भाषा अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का माध्यम है। संस्कृत को ठीक तरह से बढ़ाने की जरूरत है। ये बातें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहीं।
वे शनिवार को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बोल रहे थे। शनिवार को विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय उत्कर्ष महोत्सव की शुरुआत हुई।
नड्डा ने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल की संस्कृत आपस में मिलजुल कर रहने की बात सिखाती है। इसका साक्षात प्रमाण कोरोना काल में भी देखा गया है, जहां देश की सारी जनता ने सरकार के साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का डटकर सामना किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत की पढ़ाई इसलिए जरूरी है क्योंकि, भारत का ज्ञान-विज्ञान इसी भाषा में है। उन्होंने संस्कृत के संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व को भी स्पष्ट किया।
संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि यह उत्कर्ष महोत्सव न केवल संस्कृत विश्वविद्यालयों का है, बल्कि समस्त भारतवर्ष का है। शिक्षा में भारतीयता लाने के लिए संस्कृत के अध्ययन और अध्यापन की आवश्यकता है। तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. राधाकांत ठाकुर ने कहा कि संस्कृत का अधिक महत्व है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर बल देती है। उद्घाटन समारोह में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति विजय भटकर ने कहा कि सुपर कंप्यूटर को सक्षम बनाने में केवल संस्कृत ही समर्थ है। उन्होंने कहा कि भावना तथा मशीन के बीच निकली भाषा में भावना बचाने की सबसे प्रभावी भूमिका संस्कृत भाषा ही कर सकती है।