केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने अपने 30 पृष्ठों के फैसले में सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने आप नेता विजय नायर को जमानत देते हुए जांच एजेंसियों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि विजय नायर के खिलाफ कोई भी दस्तावेज और पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए। ऐसे में नायर की नजरबंदी को सही नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कहा, जो साक्ष्य एकत्र किए गए हैं वे गवाहों के बयानों के रूप में सभी मौखिक साक्ष्य हैं। विजय नायर के खिलाफ अदालत के सामने पेश किए गए आरोपों को प्रमाणित करने के लिए कोई दस्तावेज सबूत नहीं हैं। इसके तहत वह आरोपी नहीं पाए जाते। अदालत ने कहा इतनी बड़ी मात्रा में धन के कथित ट्रांसमिशन को दिखाने के लिए कोई अन्य सबूत नहीं दिया है। ऐसे में विजय नायर की कस्टडी को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सीबीआई के तर्क खारिज
अदालत ने सीबीआई के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि वह न तो फ्लाइट से विदेश जाने वाले हैं और न ही जमानत पर रिहा होने के बाद मामले की सुनवाई से फरार होने की संभावना है। इसके अलावा विजय नायर द्वारा सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने के मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जताई जा रही आशंकाएं भी स्पष्ट रूप से आधारहीन हैं।