विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में वायु गुणवत्ता के नियंत्रण के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें छह प्रदूषकों को लेकर अनुशंसा की गई है। इनमें पीएम 2.5, पीएम 10, ओजोन, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड व कार्बन मोनो ऑक्साइड शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने भारत को दुनिया के प्रदूषित देशों में से एक बताया है।
वहीं, राजधानी के लिए पीएम 2.5 की औसतन सांद्रता (कंसंट्रेशन) को अनुशंसा स्तर से करीब 17 गुना अधिक बताया है। इसके अलावा प्रदूषण का स्तर मुंबई में आठ गुना, कोलकाता के लिए नौ गुना व चेन्नई में पांच गुना अधिक है। वहीं, भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम 2024 के मुताबिक, देश के 122 शहरों में पीएम के स्तर में 20 से 30 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
वायु गुणवत्ता पर हवा, प्रदूषण के संसाधन, तापमान और बारिश का अहम प्रभाव पड़ता है। इस समय दिल्ली में मौसम के साथ देने के साथ बारिश भी हो रही है। यही वजह है कि प्रदूषित तत्व बारिश के साथ मिलकर धरती की सतह पर बैठ रहे हैं। इस वजह से साफ हवा में लोग सांस ले रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने नए दिशा-निर्देशों में सल्फर डाई ऑक्साइड का स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर कर दिया है जोकि पहले 20 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। पश्चिमी देशों में कोयले में सल्फर की मात्रा अधिक होती है, जबकि भारत के लिहाज से यह ठीक नहीं है। ऐसे में भारत के ऊपर इसके दिशा-निर्देश पूरी तरह फिट नहीं बैठते।
-डॉ. एसके त्यागी, पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी)
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