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अच्छी खबर : बारिश धो रही है दिल्ली के दाग, साफ श्रेणी में पहुंचा पीएम 2.5 का स्तर

Sun, 26 Sep 2021 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली 

सार

बीते दिनों हुई लगातार बारिश ने पीएम 10 व पीएम 2.5 के स्तर में कमी कर दी है। शनिवार को 28 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया पीएम 2.5 का स्तर।  
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rain in delhi ncr - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। अच्छी बात यह है कि मौसम की यह मेहरबानी हवा की गुणवत्ता के लिहाज से फायदेमंद साबित हो रही है। यही वजह है कि पीएम 10 व पीएम 2.5 का स्तर संतोषजनक से लेकर साफ श्रेणी में बना हुआ है। हालांकि, चिंता का विषय यह है कि यह राहत सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही है। बारिश का दौर थमने के बाद और अगले माह से सर्दी की शुरुआत होने के साथ ही हवा भी दमघोंटू होने लगेगी। 

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हवा की गुणवत्ता के लिए पीएम 2.5 व पीएम 10 का स्तर अधिक महत्वपूर्ण होता है। यदि यह एक सीमा से अधिक हो जाए तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ मानव स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में इस बार मानसून अधिक सक्रिय है। इस वजह से बारिश का सिलसिला बना हुआ है। ऐसे में हवा में मौजूद धूल के कण बारिश के बूंदों के साथ मिलकर जमीनी सतह पर बैठ रहे हैं। इससे दिल्ली-एनसीरआर की हवा संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की जा रही है। 

जून में खराब श्रेणी तक पहुंच गया था हवा का स्तर
मानसून के आगमन से पहले जून में दिल्ली की हवा औसत से लेकर खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही थी। उन दिनों पीएम 10 व पीएम 2.5 का स्तर 60 से अधिक था। इसके बाद 13 जुलाई को मानसून के दस्तक देने के बाद हवा के स्तर में सुधार होना शुरू हुआ था और यह सिलसिला अभी तक जारी है। 
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जून के शुरुआती दिनों की बात करें तो एक जून को औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से अधिक रहा था। इसके बाद पांच जून तक हवा का स्तर 200 एक्यूआई तक पहुंच गया था जो  औसतन श्रेणी में आता है। इसके बाद तीन दिनों तक हवा का स्तर औसत श्रेणी में रहने के बाद नौ जून को दिल्ली की हवा 300 के आंकड़े के पार खराब श्रेणी में दर्ज हुई थी। 

इसके बाद 10 से 20 जून तक दिल्ली की हवा मध्यम श्रेणी में दर्ज हुई थी, लेकिन 21 जून के बाद एक बार फिर दिल्ली की हवा बिगड़नी शुरू हो गई थी। 30 जून तक औसतन हवा के सूचकांक को पार कर गई थी।

क्या होता है पीएम 10 व पीएम 2.5 कण
वायु प्रदूषण के लिए पीएम (पार्टिकुलेट मेटर) किसी भी अन्य प्रदूषक की तुलना में अधिक लोगों को प्रभावित करता है। पीएम के प्रमुख घटक सल्फेट, नाइट्रेट, अमोनिया, सोडियम क्लोराइड, ब्लैक कार्बन, खनिज धूल और पानी हैं। 10 माइक्रोन या उससे कम व्यास वाले कण फेफड़ों के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। वहीं, इससे भी अधिक स्वास्थ्य-हानिकारक कण 2.5 माइक्रोन या उससे कम व्यास वाले होते हैं। यह फेफड़ों तक पहुंचने के साथ रक्त प्रणाली में प्रवेश कर सकते हैं। इससे हृदय और श्वसन संबंधी रोगों के साथ फेफड़ों का कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं। पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम व पीएम 10 का स्तर 100 से कम होने पर सुरक्षित श्रेणी में माना जाता है, जबकि शनिवार दोपहर तक पीएम 10 का स्तर 64 (संतोषजनक) व पीएम 2.5 का स्तर 28 (साफ) श्रेणी में दर्ज किया गया।  

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डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर जताई चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में वायु गुणवत्ता के नियंत्रण के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें छह प्रदूषकों को लेकर अनुशंसा की गई है। इनमें पीएम 2.5, पीएम 10, ओजोन, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड व कार्बन मोनो ऑक्साइड शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने भारत को दुनिया के प्रदूषित देशों में से एक बताया है। 

वहीं, राजधानी के लिए पीएम 2.5 की औसतन सांद्रता (कंसंट्रेशन) को अनुशंसा स्तर से करीब 17 गुना अधिक बताया है। इसके अलावा प्रदूषण का स्तर मुंबई में आठ गुना, कोलकाता के लिए नौ गुना व चेन्नई में पांच गुना अधिक है। वहीं, भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम 2024 के मुताबिक, देश के 122 शहरों में पीएम के स्तर में 20 से 30 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। 

वायु गुणवत्ता पर हवा, प्रदूषण के संसाधन, तापमान और बारिश का अहम प्रभाव पड़ता है। इस समय दिल्ली में मौसम के साथ देने के साथ बारिश भी हो रही है। यही वजह है कि प्रदूषित तत्व बारिश के साथ मिलकर धरती की सतह पर बैठ रहे हैं। इस वजह से साफ हवा में लोग सांस ले रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने नए दिशा-निर्देशों में सल्फर डाई ऑक्साइड का स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर कर दिया है जोकि पहले 20 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। पश्चिमी देशों में कोयले में सल्फर की मात्रा अधिक होती है, जबकि भारत के लिहाज से यह ठीक नहीं है। ऐसे में भारत के ऊपर इसके दिशा-निर्देश पूरी तरह फिट नहीं बैठते।
-डॉ. एसके त्यागी, पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) 
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