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पंजाब कांग्रेस संकट: नेतृत्व ने सिद्धू को बताई हद, विधानसभा चुनाव में अमरिंदर ही होंगे 'कैप्टन'

Thu, 26 Aug 2021 01:09 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने उन्हें दो-टूक बता दिया है कि पार्टी 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में ही लड़ेगी, वहीं नई दिल्ली में हाईकमान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस की अगुवाई कैप्टन के हाथ में ही रहेगी।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू
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विस्तार
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पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री कैप्टन अरमिंदर सिंह के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। चेहरा बदलने जैसी कोई बात नहीं है। नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी कांग्रेस उनको सौंप दी है। सिद्धू से उनके सलाहकारों पर नकेल कसने के लिए कह दिया गया है। उनके सलाहकार का कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। पंजाब मसले पर बैठक के बाद यह बात प्रदेश प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कही। 

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हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि पंजाब में अंतर्कलह जैसी बात नहीं है। कुछ मसलों को लेकर पार्टी के कुछ विधायक प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से मिले थे। उन्होंने बाहर आकर मीडिया से कह दिया, वह पार्टी हाईकमान से मिलने दिल्ली जा रहे हैं। पंजाब में कोई दोफाड़ नहीं हैं। सब कांग्रेस के झंडे के नीचे खड़े हैं। 

विधायकों के देहरादून पहुंचने के सवाल पर हरीश ने कहा कि मुझे पंजाब जाना चाहिए था, लेकिन किसी कारणवश नहीं जा सका। मैंने ही विधायकों को मिलने के लिए यहां बुलाया था। हालांकि रावत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि विधायकों की क्या शिकायतें थीं। हरीश रावत ने कहा कि वह एक-दो दिन में वह दिल्ली जाएंगे और पार्टी हाईकमान को इन परिस्थितियों के बारे में बताएंगे।
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सिद्धू के बारे में हरीश रावत ने कहा कि वह अलग परिवेश से आए हैं। कई बातों को देखते हुए उनको पंजाब प्रदेश अध्यक्ष का पद सौंपा गया है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है पूरी कांग्रेस उनको सौंप दी है। सिद्धू के सलाहकार की ओर से जो बयान दिया गया है। उससे कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस उनके बयान की निंदा करती है। 
सिद्धू के सलाहकार का बयान देशहित में नहीं, पार्टी लाइन से बाहर और निंदनीय है। सिद्धू से इस बारे में बात हुई है, उन्हें स्पष्ट तौर पर कह दिया गया है, वह उनकी सलाह अपने तक ही सीमित रखें। हरीश ने कहा कि पार्टी लाइन से बाहर किसी को भी बात नहीं करनी चाहिए। इससे बयानबाजी करने वाले और पार्टी दोनों को ही नुकसान होता है। 

विरोधियों की कैप्टन हटाओ मुहिम पहले राउंड में ही फुस्स
पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने की मुहिम शुरू करने वालों को 24 घंटे के भीतर ही जोरदार झटका लगा है। एक तरफ पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने उन्हें दो-टूक बता दिया है कि पार्टी 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में ही लड़ेगी, वहीं नई दिल्ली में हाईकमान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस की अगुवाई कैप्टन के हाथ में ही रहेगी।

चार कैबिनेट मंत्रियों और 26 मौजूदा व पूर्व विधायकों ने मंगलवार को मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के आवास पर बैठक करके कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, विरोधी गुट का यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा था, जिसे बीते दिनों प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने अचानक और बिना एजेंडे के 13 नगर निगम क्षेत्रों के कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाकर अंजाम देना चाहा था। 

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उस बैठक से पहले गुपचुप तरीके से यह रणनीति बनाई गई थी कि बिना एजेंडे के बुलाई गई विधायकों की बैठक में पटियाला से विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मौजूद रहेंगे। उनकी उपस्थिति में ही किसी विधायक के जरिए नेतृत्व पर सवाल उठाए जाएंगे। इस तरह कैप्टन की स्थिति को कमजोर साबित किया जाएगा। लेकिन विधायकों की उक्त बैठक फ्लाप होने के बाद विरोधी गुट काफी मायूस रहा।

मंगलवार को जब हाईकमान ने नवजोत सिद्धू को उनके सलाहकारों की टिप्पणियों पर जवाब तलबी के लिए दिल्ली बुलाया तो विरोधी गुट ने आनन-फानन में तृप्त बाजवा के आवास पर बैठक कर कैप्टन को हटाने की मुहिम छेड़ दी। लेकिन विरोधी गुट अपनी इस मुहिम में भी मात खा गया क्योंकि पंजाब में इस समय कांग्रेस के 80 विधायक (77 विधायक और 3 आप से आए) हैं। 

17 मंत्रियों में से केवल चार ही विरोध में दिखाई दे रहे हैं। तृप्त बाजवा के घर जुटे 26 विधायकों में से 7 विधायकों ने 24 घंटे के भीतर ही घोषणा कर दी कि वे कैप्टन के साथ हैं। इस तरह मात्र 24 विधायक और पार्टी प्रधान सिद्धू (कुल 25) के लिए संभव नहीं है कि वे मुख्यमंत्री के खिलाफ संख्या बल दिखा सकें।

कैप्टन के कामकाज से नहीं, अपने रुके कामों से नाराज हैं विरोधी
 तृप्त बाजवा ने मंगलवार को कैप्टन के खिलाफ बयान जारी करते हुए उनके कामकाज की शैली पर सवाल उठाए थे। तृप्त बाजवा और अन्य नाराज नेताओं का कहना था कि कैप्टन जनता से किए वादे पूरे नहीं कर रहे। लेकिन सीएमओ के सूत्रों के पता चला है कि जिन मंत्रियों और विधायकों ने कैप्टन के प्रति अविश्वास जताया है, उनके अपने कई काम लंबे समय से सीएमओ और अन्य विभागों में अटके हुए हैं और उनमें कैप्टन को लेकर इसी बात की नाराजगी है कि उनके काम नहीं हो रहे। 

सीएमओ के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ज्यादातर विधायक अपने चहेतों को ऊंचे ओहदों पर नियुक्त कराने, पसंदीदा अधिकारियों को अपने हलकों में तैनात कराने या नापंसद अफसरों को हटवाने की सिफारिशें लेकर आते रहे हैं। ज्यादातर मामलों में मुख्यमंत्री ही अंतिम फैसला लेते हैं। जाहिर है, अपनी सिफारिशें और काम अटकने से कई विधायक और मंत्री नाराज हैं। 
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