इस प्रारूप में आठ जेनेरिक इलेक्ट्रिक और 12 कोर पेपर हैं। यह सही नहीं है। अब अंग्रेजी और भारतीय भाषा के पेपर कर दिए गए हैं। छात्र अंग्रेजी को प्राथमिकता देंगे और भारतीय भाषा नहीं लेंगे। इससे भारतीय भाषाएं समाप्त होंगी। उन्होंने बताया कि चार वर्षीय कोर्स के प्रारूप को बनाने में कॉलेज के शिक्षकों, कॉलेज के स्टॉफ काउंसिल के साथ-साथ विभागों की काउंसिल से राय नहीं ली गई है। लिहाजा इसको सुचारू रूप देने के लिए सदस्यों के पास भेजा जाए।
कुलपति तय करेंगे नए कॉलेजों के नाम
डीयू जल्द ही दो नए कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में इनके नामों पर मुहर लगनी थी, लेकिन इसका जिम्मा कुलपति पर छोड़ दिया गया है। कॉलेजों के लिए वीर सावरकर, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, सावित्री बाई फुले, अटल बिहारी वाजपेयी, सरदार पटेल, स्वामी विवेकानंद, चौधरी ब्रह्मप्रकाश के नाम सुझाए गए थे।
एलएलबी-एलएलएम में निशुल्क मिलेगी केस सामग्री
एलएलबी और एलएलएम के विद्यार्थियों को ऑनलाइन केस सामग्री निशुल्क मिलेगी। बैठक में इसे मंजूरी मिल गई है। ऑनलाइन केस सामग्री के लिए एलएलबी के छात्रों से 1000 रुपये और एलएलएम के छात्रों से 1250 रुपये प्रति सेमेस्टर फीस ली जा रही थी।