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Pragati Maidan Tunnel : बसंत से शीत तक...हर मौसम की कलाकृतियों का करें दीदार

Sun, 10 Jul 2022 06:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली

सार

प्रत्येक रविवार को इसे लोगों के देखने के लिए खोला जा रहा है। कलाकारों ने देश में पहली बार कला का ऐसा नमूना पेश किया है, जिसके जरिये देश की छह ऋतुओं और देशभर में मनाए जाने वाले त्योहारों को बड़ी खूबसूरती व बारीकी से चित्रित किया गया है। 
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विस्तार
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प्रगति मैदान सुरंग की दीवारों पर उत्कृष्ट कलाकृतियां बनाई गई हैं। इसकी खूब तारीफ भी हो रही है। प्रत्येक रविवार को इसे लोगों के देखने के लिए खोला जा रहा है। कलाकारों ने देश में पहली बार कला का ऐसा नमूना पेश किया है, जिसके जरिये देश की छह ऋतुओं और देशभर में मनाए जाने वाले त्योहारों को बड़ी खूबसूरती व बारीकी से चित्रित किया गया है। 

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सुरंग की दीवारों पर प्रमुख नदियां गंगा, यमुना और विलुप्त सरस्वती के उद्गम से लेकर सागर में विलय तक की यात्रा को चित्रित किया गया है। इंडिया गेट से आकर यदि सुरंग में प्रवेश करें तो सबसे पहले वसंत ऋतु से भेंट होती है और सुरंग के आखिरी छोर पर शीत ऋतु के दर्शन होते हैं। हिमाचल विश्वविद्यालय के कला विभाग के डीन प्रो हिम चटर्जी ने इन कलाकृतियों को डिजाइन किया है। कलाकार संदीप त्रिपाठी और सुब्रतो बोस की निगरानी में इन्हें तैयार किया गया है। 

यदि इंडिया गेट की ओर से सुरंग को निहारें तो कैसे ऋतुओं के माध्यम से पूरे भारत का दर्शन होता है। इसके 86 पिलरों पर मंडला कला के प्रयोग से कलाकृतियां उकेरी गई हैं। इसमें भारत की आजादी के 75 वर्ष की झलक पेश की गई है। इसका दायरा दुनिया की किसी भी इस तरह की कलाकारी से बड़ा है। इसका आकार 27000 वर्ग मीटर है। इसमें सिर्फ कलाकृतियां उकेरी गई है।
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रैंप लूप पर नदियों की कहानी
इसके बाद रैंप लूप शुरू होते हैं। आईटीओ की तरफ जाने वाले रैंप लूप पर यमुना की कहानी है, इसमें सूर्य को बनाया है, क्योंकि यमुना सूर्य की पुत्री हैं। इसके बाद उनके यमुनोत्री से दिल्ली, मथुरा होते हुए प्रयागराज तक के सफर का वर्णन किया है। नोएडा से सुरंग में आने वाला रैंप लूप विलुप्त प्राय सरस्वती नदी पर आधारित है। प्राचीन सिंधू घाटी सभ्यता को सरस्वती नदी से जोड़कर दिखाया गया है। देवी सरस्वती के वाहन, कमल को प्रदर्शित किया गया है। राजघाट से सुरंग में प्रवेश करने वाले रैंप लूप पर गंगा नदी की पूरी यात्रा को देखा जा सकता है। भगवान शिव के केस से निकलती गंगा को बनाया गया है। इसमें ऋषिकेश से प्रयागराज और कोलकाता तक के सफर को दिखाया है। 
  
इंडिया गेट की तरफ टनल में प्रवेश करने पर दिखेगा ऐसा नजारा

  • टनल की दीवार पर सबसे पहले वसंत ऋतु के दर्शन होंगे। लोहे की चादरों और रंगों के इस्तेमाल से बनाए गए उड़ते पक्षी, पीपल, बरगद के पेड़ों की कलाकृतियां स्वागत करती हैं, जिसके लिए पीले रंग का इस्तेमाल किया गया है। साथ में सरस्वती पूजा, होली, केरल के त्योहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के त्योहार उगाड़ी को दर्शाया गया है।
  • इसके बाद ग्रीष्म ऋतु को दिखाने के लिए पानी की जरूरत के लिहाज से गंगा दशहरा, नदियां, जगन्नाथ पुरी और मीनाक्षी मंदिर में होने वाले विशेष आयोजनों को दर्शाया गया है। इसके लिए संतरे के रंग का इस्तेमाल किया है। सुरंग के दूसरी तरफ बुद्ध पूर्णिमा का चित्रण है।
  • फिर करीब सौ मीटर तक अतुल्य भारत का चित्रण है। यह बेहद खूबसूरत है। यहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक के धरोहर स्थलों की कलाकृतियां बनाई गई हैं। डल झील पर तैरती नाव, जम्मू के प्रसिद्ध मंदिर, उत्तराखंड, हिमाचल के प्रसिद्ध मंदिर, कुल्लू-चंबा गेट, दिल्ली और आगरा का लाल किला दर्शाया गया है।
  • वर्षा ऋतु को दिखाने के लिए पानी के प्रतीकों को दर्शाया है। नाचता मोर, ओणम त्योहार, महाराष्ट्र में गणेश पूजन, शिवाजी पूजन, तीज उत्सव, मेहंदी लगाती महिलाओं को दिखाया है।
  • शरद ऋतु को दिखाने केे लिए शारदीय नवरात्रि मैसूर का किला, माउंट आबू का विशेष त्योहार, विजय दशमी, नवरात्रि, गुजरात का डांडिया नृत्य की कृतियां बनाई गई हैं। इसके लिए गुलाबी रंग का इस्तेमाल किया है।
  • हेमंत ऋतु के लिए कृषि को प्रदर्शित किया है, खेत में काम करते किसान, दीपावली, धनतेरस, विश्वकर्मा पूजा, छठ, भैया दूज और धन्वंतरि भगवान को दर्शाया है। इसके लिए जामुनी रंग का इस्तेमाल किया है। 
  • शीत ऋतु को दिखाने के लिए पहाड़ों, क्रिसमस, नववर्ष, लोहड़ी, मकर संक्रांति, उत्तरायण त्योहार को दिखाया है।

 

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