कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मास्क व शारीरिक दूरी के साथ टीके को आधार बनाया गया है। यही वजह है कि केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकारें टीकाकरण पर जोर दे रही हैं। इसके लिए दिल्ली में सरकारी व निजी को मिलाकर करीब 900 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं।
यहां हर दिन हजारों की संख्या में दिल्लीवासी टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, दिल्ली की करीब दो करोड़ की आबादी को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि हर घर को सेहत से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता है।
टीकाकरण की रफ्तार बढ़ने से दिल्ली के 100 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सकता है। इससे लोगों को सुरक्षा कवच मिलेगा। सेहत ठीक होने के साथ परिवार भी सुरक्षित रहेगा।
दिल्ली की आबादी का एक हिस्सा टीकाकरण से वंचित है। सरकार को प्रत्येक व्यक्ति का आंकड़ा जुटाकर उन्हें टीकाकरण के लिए प्रेरित करना चाहिए। क्योंकि अभी भी कई ऐसे लोग हैं, जो टीके के लिए तैयार नहीं हैं। अधिक से अधिक टीकाकरण के लक्ष्य से कोरोना की जंग जीतने में मदद मिल सकती है।
-डॉ. अनन्य गुप्ता, एम्स
शुरुआत में लोग टीकाकरण के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन वक्त के साथ-साथ लोगों ने इसे अपनाना शुरू किया। अब हालात पहले से बेहतर हैं। टीके की खुराक काफी परीक्षण के बाद ही बाजार में आई है। कुछ लोगों को टीके के बाद हल्का बुखार हो सकता है। लेकिन, यह पूरी तरह से सुरक्षित है। जिन लोगों ने अभी तक टीके की खुराक नहीं ली है, उन्हें भ्रम दूर कर टीके के लिए आगे आना चाहिए और परिवार को भी टीकाकरण के लिए तैयार करना चाहिए, जिससे दिल्ली में अधिक से अधिक टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। टीकाकरण के लिए गली-मोहल्लों से भी शुरुआत हो सकती है। इसके लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता होगी।
-डॉ. आशीष चंदेल, जीबी पंत अस्पताल में अध्ययनरत
टीकाकरण के लिए सरकार ने कई अभियान चलाए हैं। लेकिन, अब भी समाज का एक तबका ऐसा है, जो टीकाकरण से वंचित है। सरकार को इनके लिए अलग से शिविर लगाकर टीकाकरण करना चाहिए। इसके लिए दिल्ली की अलग-अलग कॉलोनियों में ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जो टीकाकरण से दूर है। कुछ लोगों की काउंसलिंग कराकर टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना होगा। तभी दिल्ली में 100 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
-डॉ. सुमेध कुमार, आरएमएल अस्पताल
दिल्ली में टीकाकरण के लिए कई केंद्र बने हुए हैं। अच्छी बात यह है कि सरकार ने टीकाकरण के लिए पहली खुराक से लेकर एहतियाती खुराक को मुफ्त किया है। लोगों को यह समझना होगा कि टीके की खुराक लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं है। बल्कि, टीके से लोगों के शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं, जो संक्रमण से लड़ने में कारगर है। जिन लोगों ने पहली और दूसरी खुराक ले ली है, वे छह महीने बीतने पर एहतियाती खुराक को भी अपनाएं।
-डॉ. प्रेरणा, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज