प्रदूषण के कारण दिल्ली-एनसीआर में बने गंभीर हालात के बीच अस्पतालों में मरीजों का पहुंचना जारी है। बीते दो दिन में सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या 25 फीसदी बढ़ी है। मरीज सांस संबंधी और अन्य समस्याएं लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।
प्रदूषण के कारण इन दिनों एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लोकनायक, जीबी पंत, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी, जीटीबी समेत अन्य अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला बना हुआ है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के साथ सीने में दर्द, जलन व अन्य समस्याएं हो रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बीते दो दिन में प्रदूषण की वजह से हालात गंभीर बने हुए हैं। यह वातावरण के साथ-साथ मनुष्य के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि ओपीडी में मरीज प्रदूषण से होने वाली परेशानियों को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें भी उन मरीजों की संख्या अधिक है, जो पहले से ही मधुमेह, अस्थमा व दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा
प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चे व बुजुर्ग कम से कम बाहर निकलें। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से इन पर प्रदूषण का प्रभाव अधिक हो सकता है। जो बुजुर्ग पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, वे जरूरी होने पर ही घर से निकलें। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को भी बाहर न निकलने की सलाह है।
यह करें
- कुछ दिन तक सुबह-शाम की सैर के लिए बाहर जाने से बचें।
- कोशिश करें कि दिन में चार से पांच मिनट के अंतराल पर गुनगुना पानी पीते रहें।
- बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें।
- छोटे बच्चों को बाहर के वातावरण से बचाकर रखें।
- दो दिन तक बुखार रहने पर खून की जांच जरूरी। डेंगू, मलेरिया व टायफाइड का टेस्ट कराएं।
- आगामी दिनों में कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका, भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।