उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को रमजान के लिए निजामुद्दीन मरकज स्थित मस्जिद को फिर से खोलने की अनुमति प्रदान कर दी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने अपने फैसले में कहा कि पवित्र महीने और ईद के दौरान श्रद्धालुओं को इमारत में नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। साथ ही अदालत ने मस्जिद प्रशासन को प्रवेश और निकास के साथ-साथ सीढ़ियों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और फुटेज का रिकॉर्ड रखने का भी निर्देश दिया है।
अदालत ने निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद को पूरी तरह से खोलने की मांग करने वाली दिल्ली वक्फ बोर्ड की याचिका में यह आदेश पारित किया है। कोर्ट को बताया गया कि चूंकि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के ताजा आदेश ने धार्मिक स्थलों पर सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं, इसलिए लोगों को मरकज मस्जिद में भी नमाज अदा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि उन्होंने थानाध्यक्ष के समक्ष मस्जिद को खोलने की अनुमति के लिए आवेदन किया था और कुछ शर्तों के अधीन इसकी अनुमति दी गई है।
पिछले महीने थानाध्यक्ष द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद कोर्ट ने शब-ए-बरात के लिए एक दिन के लिए मस्जिद खोलने की अनुमति दी थी। याचिकाकर्ताओं को रमजान और ईद के लिए मस्जिद खोलने के लिए पुलिस के समक्ष इसी तरह का आवेदन करने के लिए कहा था।
शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने अधिकांश शर्तों का पालन किया है लेकिन वे यह घोषणा करने में विफल रहे कि विदेशियों को अनुमति नहीं है और सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं।
वक्फ बोर्ड के सदस्यों को हटाने संबंधी याचिका पर मांगा जवाब
उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली वक्फ बोर्ड के तीन सदस्यों को हटाने की मांग वाली याचिका पर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने यह याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने एलजी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए।
अदालत ने मामले की सुनवाई 5 अप्रैल तय की है। खान के खिलाफ बोर्ड के चार सदस्यों ने उपराज्यपाल को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भेजा था। याचिका में कहा गया है कि बोर्ड ने 27 दिसंबर 2021 और 7 मार्च 2022 को आवेदन कर तीन सदस्यों को हटाने की मांग की थी लेकिन सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।