देश लगातार आतंकी गतिविधियों के कारण हिंसा का सामना कर रहा है। इस तरह की गतिविधियों में हजारों निर्दोष लोग मारे जाते हैं। आतंकवादी गतिविधियों से न केवल निर्दोष लोगों की जान जाती है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को भी अस्थिर करता है। आतंकवादी गतिविधि पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय है। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए देश को अस्थिर करने और आतंकवादी पैदा करने के मकसद से भारत में घुसपैठ करने के लिए दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी नागरिक एवं लश्कर ए तैयबा के आतंकवादी को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने मोहम्मद आमिर को सजा सुनाते हुए कहा कि दोषी की सजा पूरी होने के बाद से वापस पाकिस्तान भेज दिया जाए। अदालत ने आरोपी को सजा सुनाते हुए कहा कि देश लगातार आतंकवादी गतिविधियों के कारण हिंसा का सामना कर रहा है। इस तरह की गतिविधियों में हजारों निर्दोष लोग मारे जाते हैं। आतंकवादी गतिविधियों से न केवल निर्दोष लोगों की जान जाती है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को भी अस्थिर करता है। आतंकवादी गतिविधि पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय है।
अदालत ने आमिर को अप्रैल माह में आपराधिक षडयंत्र, देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियों, आर्मस एक्ट, विस्फोटक अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने अब उसे सजा सुनाई है। आमिर ने पिता के न होने, मां अपाहिज व अपनी कम उम्र के होने और सामान्य जीवन जीने की इच्छा के लिए न्यूनतम सजा का आग्रह किया, लेकिन अदालत ने उनके कृत्य को देख आग्रह को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा दोषी निश्चित रूप से एक पाकिस्तानी नागरिक है और उसने इस देश के क्षेत्र में उन्नत हथियारों और अन्य उपकरणों के साथ घुसपैठ की। दोषी को उन्नत हथियारों और उपकरणों के साथ संचार उपकरणों के साथ गिरफ्तार किया गया। आमिर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने वर्ष 2017 में पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा का प्रशिक्षित कैडर पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया था। बाद में उसके पास से एके-47 राइफल और हथगोले सहित कई आपत्तिजनक सामान जब्त किया गया।