गाजीपुर लैंडफिल साइट पर अब दोगुनी गति से कूड़े के पहाड़ को घटाने में मदद मिलेगी। पूर्वी निगम ने अब यहां पर पुरानी की जगह नई हाई स्पीड ट्रोमल मशीनें लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये मशीनें हर माह करीब तीन लाख टन कचरे का निस्तारण करने में सक्षम हैं।
गाजीपुर लैंडफिल पर अनुमानित 140 लाख टन पुराना अपशिष्ट अभी भी पड़ा है। इसको निष्पादित करना पूर्वी दिल्ली नगर निगम के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने पुराने मॉडल की ट्रोमल मशीनों को हटाकर नए मॉडल की हाई स्पीड मशीनें लगाना शुरू कर दिया है। इन मशीनों को दो पालियों में चलाया जाएगा। इस तरह निगम की अपशिष्ट निष्पादन की कुल क्षमता 3 लाख टन प्रति माह हो जाएगी।
अभी तक वहां जो ट्रोमल मशीनें कार्य कर रही हैं, उनकी क्षमता कम है और वे स्थान ज्यादा घेर रही हैं। इस समय अनुमानित 1.20 लाख टन प्रति माह के हिसाब से अपशिष्ट का निष्पादन हो रहा है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा है कि योजनानुसार अगले ढाई साल में कूड़े का पहाड़ यहां से हट चुका होगा।
10000 मीट्रिक टन कचरा दिल्ली में रोजाना निकलता है
निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में रोजाना करीब 10 हजार मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है। करीब ढाई हजार मीट्रिक टन पूर्वी निगम, साढ़े तीन हजार मीट्रिक टन दक्षिणी निगम और चार मीट्रिक टन कचरा उत्तरी निगम क्षेत्र में पैदा होता है।
कचरा निस्तारण के लिए एक और टेंडर
पूर्वी दिल्ली नगर निगम की तरफ से 50 लाख टन अपशिष्ट को संशोधित करने के लिए एक नया टेंडर और जारी किया हैं। अभी इस टेंडर का मूल्यांकन किया जा रहा है। शीघ्र ही कार्य आदेश जारी होने की संभावना है। इसके बाद गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कचरे के पहाड़ को कम करने में और तेजी आएगी।
स्थानीय स्तर पर 5200 टन कचरे का निस्तारण
मौजूदा समय में अधिकतर सूखा कचरा कॉम्पैक्टर मशीनों के माध्यम से निस्तारित हो रहा है। तीनों निगम बड़ी संख्या में गीले कचरे से कंपोस्ट भी बना रहे हैं। इसके बावजूद अभी गाजीपुर, ओखला और भलस्वा के लैंडफिल में कचरा फेंका जाता है। करीब 5200 टन कचरे को कॉम्पैक्टर और कचरे से ऊर्जा में परिवर्तित करने वाले संयंत्रों की सहायता से स्थानीय स्तर पर प्रोसेस किया जाता है।
18 बार साइट पर लग चुकी आग
गाजीपुर लैंडफिल साइट पर आए दिन आग लगती रहती है। अभी 28 मार्च को फिर से यहां आग लग गई थी। तीन दिन तक आसपास के लोग कचरे से निकले खतरनाक धुएं से परेशान थे। लैंडफिल साइट से हल्का धुआं अभी भी निकल ही रहा है।
- लगातार आग लगने से स्थानीय निवासियों में रोष है। आसपास के लोगों को सांस लेने में भी दिक्कतें हो रही है। बच्चे बीमार हो रहे हैं।