कोरोना वार्ड में बिस्तर खाली पड़े हैं। वार्ड के बीचों-बीच रखी इकलौती मेज पर सादे कागज व दो कलम के साथ सेनिटाइजर तो रखा है, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं है। नजदीक की कुर्सियों पर बैठे स्टॉफ की भी आपस में हंसी-मजाक का दौर नहीं थमता। एकबारगी लगता ही नहीं कि यह दिल्ली एम्स का वही कारोना वार्ड है, जहां दो महीने पहले तक मातम पसरा था। हर तरफ भागमभाग, मरीजों की चीख-चिल्लाहट, थके कदमों से चहलकदमी करते तीमारदार ही नजर आते थे।
एम्स के जय प्रकाश नारायण ट्रामा सेंटर की ऊपरी मंजिल पर मौजूद इस वार्ड में सफेद रंग की पीपीई से कवर यह सभी देखने में नर्स, डॉक्टर या फिर पैरामेडिकल स्टाफ ही नजर आ रहे हैं, लेकिन इस स्थिति में इनकी पहचान कर पाना भी संभव नहीं। आंखों पर बड़ा-बड़ा चश्मा और उसके ऊपर लगी फेस शील्ड पहचान जाहिर नहीं होने दे रही लेकिन पीपीई किट के ऊपर नीले रंग की स्याही से लिखे मोटे अक्षरों से पता चलता है कि इनमें एक डॉक्टर और बाकी तीन नर्स हैं।
महामारी के बीच एम्स के किसी वार्ड में इतने खाली बिस्तरों का यह नजारा शायद पहली बार है। जब इन स्वास्थ्य कर्मचारियों से इसकी वजह पूछी गई तो कहने लगे, आपको यह देख अच्छा नहीं लग रहा क्या? इन खाली बिस्तरों को देख हमारे मन को तो बहुत सुकून मिलता है। सुबह आते हैं, फिर इसी तरह बैठे रहते हैं और ड्यूटी पूरी होने के बाद चले जाते हैं। पांच दिन से हमने कोई नया मरीज नहीं देखा। इसी मंजिल पर और भी वार्ड हैं, वहां भी आपको ऐसे ही खाली बिस्तर मिल जाएंगें।
अब सिर्फ दो ही मरीज हैं भर्ती, बाकी सब खाली
बातचीत में एक नर्स ने तपाक से बोला कि दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर को पिछले वर्ष कोरोना महामारी के लिए आरक्षित किया था। तब से लेकर अब तक यहां तीन हजार से भी अधिक कोरोना मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। फिलहाल यहां पहली बार केवल दो ही बिस्तर भरे हुए हैं जिनमें से एक मॉरिशस के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और दूसरा एक अन्य मरीज। दोनों ही कोरोना संक्रमित मरीज गंभीर स्थिति से बाहर हैं।
भगवान नहीं चाहते कोई लहर
अभी नर्स अपनी बात खत्म कर पाती उससे पहले महिला डॉक्टर ने मजाकिया अंदाज में कहा, हमारे समाज में डॉक्टरों को लोग भगवान का दर्जा देते हैं और अब यही भगवान नहीं चाहते कि कोरोना की फिर कोई लहर सामने आए। अस्पताल के बाहर लोगों को देख लगता ही नहीं कि कुछ महीने पहले क्या स्थिति थी? हम वो दिन नहीं भूल सकते। इन खाली पड़े बिस्तरों को देख वह पूरा एक महीना याद आ जाता है जब एक-एक बिस्तर के लिए कैसे मारामारी मची हुई थी। हमारे भी कई साथी अपनी जान गंवा चुके हैं। किसी के पिता तो किसी ने अपनी मां और पत्नी को इसलिए खो दिया क्योंकि उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल सका।
नहीं गूंज रही वेंटिलेटर की आवाज
महिला डॉक्टर ने कहा, आप देखिए आसपास कितना शांति का माहौल है। अब वेंटिलेटर की आवाज नहीं गूंज रही है और न ही आईसीयू जैसे दर्द, कराहट और मौत होने से पहले हार्ट पंप करने जैसी भागदौड़ देखने को मिल रही है।