उत्तर रेलवे ने हरित ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक वर्ष में अपनी सौर ऊर्जा क्षमता तीन गुना बढ़ा दी है। रेलवे अब ट्रेनों के कोचों में लाइट, पंखे और अन्य आवश्यक उपकरणों को सौर ऊर्जा से संचालित कर बिजली की बचत कर रहा है। विशेष रूप से डीजल संचालित ट्रेनों के कोचों में लगाए गए सोलर पैनल ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, जिससे ग्रिड और डीजल आधारित बिजली पर निर्भरता कम हुई है।
भारतीय रेलवे ने ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) तकनीक के साथ 60 जोड़ी ट्रेनों तथा कई चयनित कोचों में सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली का सफल परीक्षण और संचालन किया है। उत्तर रेलवे की शकूरबस्ती कार्यशाला में सौर पैनलों से लैस डेमू (डीजल इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट) ट्रेनें और कोच तैयार किए गए हैं। प्रत्येक कोच की छत पर 16 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो दिनभर ऊर्जा उत्पादन कर कोच की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। रेलवे नेटवर्क के तेजी से विद्युतीकरण और प्रदूषण कम करने की रणनीति के तहत पुराने डीजल इंजनों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों से बदला जा रहा है।
सिस्टम को धूल से बचाने के लिए खास डिजाइन
कोच की छत पर लगे सोलर पैनलों से उत्पन्न ऊर्जा एमपीपीटी कंट्रोलर तक पहुंचती है। यहां से इसे बैटरियों में संग्रहित किया जाता है। इनवर्टर के माध्यम से इस बिजली को उपयोग योग्य बनाया जाता है। रात या बादल होने की स्थिति में बैटरी बैकअप काम आती है।
2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का रखा है लक्ष्य
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन’ हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत स्टेशनों की छतों, खाली भूमि और रेल ट्रैक के किनारे सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं।
यात्री को क्या फायदा
बिजली आपूर्ति बाधित होने या ग्रिड फेल होने की स्थिति में भी कोच में लाइट और पंखों की सुविधा बनी रहती है। इससे यात्रियों का सफर अधिक आरामदायक और सुविधाजनक होता है। रेलवे की परिचालन लागत भी कम होती है।
सोलर कोच का असर और भविष्य का रोडमैप
प्रत्येक वर्ष करोड़ों यूनिट बिजली की बचत
एक सोलर कोच प्रतिदिन लगभग 4.5 किलोवाट बिजली पैदा कर सकता है।
इससे हर कोच सालाना 12 से 15 हजार यूनिट तक ग्रिड बिजली की बचत करता है।
हजारों कोच के जुड़ने से यह बचत करोड़ों यूनिट तक पहुंच रही है।
प्रत्येक सोलर कोच सालाना करीब 9 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद करता है, जिससे पर्यावरण को बड़ा लाभ मिल रहा है।