राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में बिना सरकारी अनुमति चल रहे कबाड़ गोदामों के मुद्दे पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) को फटकार लगाई है। इनके कारण इलाके में काफी शोर व वायु प्रदूषण हो रहा है।
एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस ए के गोयल की पीठ ने कहा कि डीपीसीसी इस अहम मुद्दे का समाधान करने में नाकाम रही है। अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से अनभिज्ञ डीपीसीसी ने लापरवाह तरीके से रिपोर्ट दाखिल की है।
पीठ ने कहा कि डीपीसीसी ने केवल दो गोदामों पर कार्रवाई की है जबकि पिछले आदेश में कहा गया था कि सभी गोदाम मास्टर प्लान और फैसले का उल्लंघन कर रहे हैं। डीपीसीसी को ये पता करना करना था कि ये कबाड़ कहां से आता है और कहां जाता है। इसके साथ ही सुनिश्चित करना था कि ऐसी कोई भी गतिविधि बिना जरूरी सरकारी अनुमति के संचालित न हो। इसके साथ ही पर्यावरणीय नियमों तथा ध्वनि नियमों का पालन किया जाए।
मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए पीठ ने कहा कि ऐसे में डीपीसीसी चेयरमैन तथा सदस्य सचिव की जवाबदारी बनती है। इन अधिकारियों पर कार्रवाई करने से पहले पीठ सदस्य सचिव तथा पूर्वी दिल्ली नगर निगम आयुक्त को इस मामले में जरूरी कदम उठाने का अंतिम मौका दे रही है। इसमें नाकाम रहने पर ये अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होेंगे और इन पर सख्त कार्यवाही होगी।
पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई पर सदस्य सचिव, निगमायुक्त, दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त पूर्वी रेंज अनुपालना रिपोर्ट के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर तय की गई है।
पीठ ने ये निर्देश सुनील कुमार नामक शख्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। उसने अपनी याचिका में सोनिया विहार वार्ड संख्या 60ई में अवैध रूप से कबाड़ गोदामों के चलने का आरोप लगाया है। याची का कहना है कि इस इलाके में करीब ऐसे 400 गोदाम हैं। इनसे काफी शोर और वायु प्रदूषण होता है।