दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद मामले में अनियमितता की जांच सीबीआई करेगी। गृह मंत्रालय ने इसकी सिफारिश कर दी है। बसों की खरीद मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से इस मामले में उचित कदम उठाने को कहा है। इस मामले की दिल्ली के मुख्य सचिव को भी जानकारी दे दी गई है। बसों की खरीद मामले की सीबीआई जांच की बात सामने आते ही एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
मामले की सीबीआई जांच पर दिल्ली सरकार ने तमाम आरोपों को खारिज करते हुए सच्चाई से परे बताया है। इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने पहले ही क्लीन चिट दे दी थी। दिल्ली सरकार ने इसे आम आदमी पार्टी के खिलाफ राजनीति से प्रेरित साजिश करार दिया है। सरकार ने भाजपा को घेरते हुए कहा कि दिल्लीवासियों को नई बस की सुविधा देने से रोकना चाहती है।
पहले भी केंद्र सरकार ने सीबीआई का इस्तेमाल कर दिल्ली सरकार को परेशान करने के विफल प्रयास कर चुकी है। आरोपों में सच्चाई न होने की वजह से केंद्र को सफलता नहीं मिल सकी। दिल्ली सरकार बदनाम करने की राजनीति में विश्वास नहीं करती। सरकार केवल सुशासन में विश्वास करती है और इसके लिए प्रतिबद्ध है।
मार्च में दिल्ली भाजपा के विधायक के बाद कांग्रेस ने भी बसों की खरीद मामले में अनियमितता के आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में कांग्रेस ने केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी)से भी इस मामले की शिकायत दी।
उपराज्यपाल ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी ने सभी पहलुओं की जांच के बाद रिपोर्ट सौंप दी थी। कमेटी ने कहा था कि बसों की खरीद में अनियमिता या आपराधिक षड़यंत्र के साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन वार्षिक रखरखाव के लिए अनुबंध(एएमसी) प्रक्रिया पर कई तरह के सवाल उठे थे। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को बसों की खरीद मामले की शुरुआती जांच सीबीआई से करवाने की दिशा में पहल करने को कहा है।
घोटाला को दबाने की हुई कोशिश, सच होगा सामने
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार ने ट्वीट कर कहा है कि 1000 बसों की खरीद और एएमसी में 4288 करोड़ के घोटाले की सीबीआई और सीवीसी जांच की मांग की थी। उन्होंने दिल्ली सरकार और भाजपा की ओर से मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया। अनिल कुमार ने कहा कि बसों के रखरखाव के मद में करीब 3500 करोड़ रुपये का टेंडर रद्द करने के बजाय दिल्ली सरकार तीन सदस्यीय कमेटी की तरफ से क्लीन चिट का हवाला देते हुए सच्चाई की जीत का दावा कर रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में सीबीआई सजा दिलवाएगी।
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सर्वेश कुमार