अब पक्षियों की अटखेलियां मेट्रो की रफ्तार पर बार-बार ब्रेक नहीं लगा सकेगी। मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर पर अक्सर पक्षियों के कारण ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) में तकनीकी खराबी या तारों के टूटने से घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
यात्रियों की परेशानी और समय की पाबंदी के लिहाज से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) मौजूदा मेट्रो नेटवर्क पर 12 हजार जगहों पर 30 हजार स्पाइक डिस्क लगाएगा। इनकी बनावट के कारण पक्षी ओएचई के पास नहीं बैठेंगे और न ही कोई तार या किसी उपकरण के क्षतिग्रस्त हिस्सा ओएचई से टकराएगा।
हफ्ते में दो बार ब्लू लाइन पर पक्षियों के टकराने से मेट्रो सेवाएं प्रभावित होने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए डीएमआरसी ने स्पाइक डिस्क की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर ली है। पहले दिल्ली मेट्रो ने अपने नेटवर्क के आसपास पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए स्पाइक डिस्क लगाने की शुरुआत की थी।
एलिवेटेड कॉरिडोर पर ओएचई में तकनीकी खराबी या टूटने की समस्या को दूर करने के लिए कुछ पुराने उपकरणों को बदलकर अत्याधुनिक उपकरण लगाने की शुरुआत की गई है। इसके तहत ओएचई पर लगने वाले कॉपर स्प्लिट पिन की जगह स्टेनलेस स्टील पिन लगाए जा रहे हैं। अब तक 10 हजार से अधिक जगहों पर करीब 22 हजार कॉपर स्प्लिट पिन बदले जा चुके हैं।
बार-बार प्रभावित नहीं होंगी मेट्रो सेवाएं
पुराने उपकरणों को आधुनिकता में बदलने से तकनीकी खामियां तो कम हुईं, लेकिन चिड़िया या बाहरी किसी चीज से टक्कर की आशंका लगातार बनी हुई है। दो दिनों के दौरान ब्लू लाइन पर इंद्रप्रस्थ-यमुुना बैंक मेट्रो स्टेशन के बीच आईएचई में आई खराबी से सेवाएं प्रभावित रही। इसके बाद ओएचई पर इंसुलेटर के नजदीक स्पाइक डिस्क की संख्या को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
क्या होता है स्पाइक डिस्क
स्पाइक डिस्क एक उपकरण है। इसकी बनावट ऐसी है कि नुकीले हिस्से के पास कोई भी पक्षी बैठने से कतराता है। तेज हवा के कारण ऊंचे पेड़ों से गिरने वाले तिनके या किसी और बाहरी चीज के ओएचई से टक्कर को भी डिस्क रोकेगा। इससे पक्षियों के तार से टकराने का खतरा नहीं रहेगा।