केंद्र सरकार तीनों निगमों के एकीकरण के अलावा दिल्ली नगर निगम अधिनियम (डीएमसी एक्ट) में कई बदलाव करने की कवायद में जुटी है। केंद्र महापौर को मुख्यमंत्री की तरह अधिकार देने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा नगर निगम में स्थायी समिति खत्म करने और पार्षदों को वेतन देने का भी प्रावधान करने की सोच रही है।
ऐसे प्रावधान करीब आठ साल पहले
दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम (डीएमसी एक्ट) में परिवर्तन कराने के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में शामिल हैं। प्रदेश भाजपा के नेता केंद्र सरकार से उस ड्राफ्ट के अधिकतर प्रावधानों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। दिल्ली नगर निगम के आयुक्त रहे और दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग के तत्कालीन आयुक्त राकेश मेहता ने वर्ष 2014 में दिल्ली नगर निगम अधिनियम (डीएमसी एक्ट) में परिवर्तन कराने की तैयारी शुरू की थी। इस कड़ी में उन्होंने एक ड्राफ्ट तैयार किया था। इस बारे में प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेता वाकिफ हैं। सूत्रों के अनुसार, इन वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र से ड्राफ्ट के अधिकतर प्रावधानों लागू करने की मांग की है।
पांच साल में तीन मेयर बनाने का सुझाव
सूत्रों के बताया कि ड्राफ्ट में पांच साल के दौरान तीन महापौर बनाने और प्रत्येक महापौर का 20 माह का कार्यकाल का सुझाव है। पहला महापौर महिला, दूसरा अनुसूचित जाति का और तीसरा किसी भी पार्षद बनाने का सुझाव है। इसके अलावा ड्राफ्ट में महापौर को शक्तिशाली बनाने के लिए भी कई सुझाव हैं। इनमें महापौर को नगर निगम का सर्वेसर्वा बनाने की बात की गई है। ड्राफ्ट में महापौर को वित्तीय अधिकार एवं अधिकारियों का तबादला करने और उनकी कार्य रिपोर्ट लिखने का अधिकार देने का भी सुझाव है।
इस कड़ी में स्थायी समिति की व्यवस्था खत्म करके महापौर की सहायता के लिए विभागों का कामकाज देखने के लिए 10-12 पार्षदों की एक टीम (मंत्रिमंडल) की व्यवस्था करने पर जोर दिया है।
10 हजार हो सकता है पार्षदों का वेतन
ड्राफ्ट में पार्षदों को वेतन देने की भी बात की गई है। प्रत्येक पार्षद को प्रतिमाह 10 हजार रुपये वेतन देने का सुझाव है। इसके अलावा उन्हें विधायकों की तरह भत्ते देने पर भी जोर दिया है। अभी तक पार्षदों को एक बैठक के भत्ते के तौर पर 300 रुपये मिलते हैं और भत्ते के तौर पर उन्हें एक माह में तीन हजार रुपये से अधिक नहीं मिल सकते। पार्षद करीब दो दशक से वेतन और विभिन्न भत्ते देने की मांग कर रहे हैं।
वार्डों के नए सिरे से गठन की तैयारी
केंद्र सरकार तीनों नगर निगमों का विलय करने के साथ-साथ उनके वार्डों का नए सिरे से गठन करने पर भी विचार कर रही है। दरअसल, केंद्र सरकार चाहती है कि नगर निगम में बड़े नेता पार्षद बनकर आएं। इस कारण वार्डों की संख्या कम करके उनकी आबादी एवं क्षेत्रफल बढ़ाया जाए। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं के भीतर 80 हजार से सवा लाख की आबादी का एक वार्ड बनाना चाह रही है।
ऐेसी स्थिति में जिन विधानसभा क्षेत्र में तीन एवं चार वार्ड है उनमें दो वार्ड बनेंगे, जबकि जिन विधानसभा क्षेत्र में पांच एवं छह वार्ड है उनमें तीन वार्ड होंगे। वहीं, मटियाला विधानसभा क्षेत्र में चार वार्ड होंगे। इस विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में सात वार्ड हैं। इसके अलावा भाजपा के कुछ नेता चाहते है कि नए सिरे से वार्ड बनाने के दौरान विधानसभा क्षेत्र की सीमा का प्रावधान खत्म किया जाए और एक लाख की आबादी पर एक वार्ड बनाया जाए।