- भौगोलिक दृष्टि से दिल्ली को देखते हुए इसके पड़ोसी राज्यों से सामांजस्य बिठा बात कर प्रदूषण को कम करना। प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन का समाधान करने के लिए सहयोगात्मक कार्यों को शुरू किया जाएगा।
- जल प्रदूषण को कम करने के लिए संबंधित राज्यों सरकारों के साथ यमुना नदी में पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह को को बनाए रखने के लिए सुनिश्चित किया जाएगा।
- संबंधित राज्य सरकारों को बायोमास जलाने, प्रदूषणकारी उद्योगों, वाहनों के उत्सर्जन, ईट भट्टे, कोयला आधारित बिजली संयंत्र आदि जैसे प्रदूषण के प्रमुख स्त्रोतों के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के मानकों का पालन कराया जाएगा।
- प्रदूषणकारी उद्योगों को दिल्ली के अंदर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संबंधित एजेंसियों की ओर से एक संयुक्त कार्य योजना विकसित की जाएगी जो मौजूद प्रदूषणकारी उद्योगों को स्थानांतरित करेगी। इनके स्थान पर गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियां, सेवा उद्योग व सेवा निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा।
- वाहनों के प्रदूषण को कम करने कि लि कार्यस्थलों और घरों के पास ही परिवहन नेटवर्क को करीब लाकर औसत यात्रा को कम करने के साथ ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलेपमेंट(टीओडी) को अपनाया जाएगा।
- पैदल चलने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी जोर रहेगा वहीं, साइकिल ट्रैक आदि के सरंचना में सुधार व निर्माण कर यात्रा संसाधनों को बढ़ाया जाएगा।
- प्राकृतिक ग्रीन व ब्लू संपदा का संरक्षण व सुधार पर भी जोर रहेगा। इसके तहत नदी, नाले और जलाशयों को अधिसूचित कर लिया गया है। इनके संरक्षण के लिए एक क्षेत्र भी प्रदान किया जाएगा और यहां सीमित विकास की ही अनुमति होगी।
- प्रकृति के साथ लोगों का भी जुड़ाव किया जाएगा। इसके तहत विशिष्ट क्षेत्रों और मार्गों को इंटरेक्टिव जोन के रूप में चिन्हित किया जाएगा। यहां व्यायाम, योग, प्रकृति कक्षाएं, पिकनिक जैव विविधता पर्यटन आदि की सुविधाएं मिल सकेंगी।
- यमुना और उसेक बाढ़े के मैदानों के कायाकल्प के लिए भी विशेष पहल की जाएगी। इसके तहत नदी की किनारे 300 मीटर चौड़ा हरित बफर बनाया जाएगा। पेड़ लगाने के साथ-साथ जंगली घास व वनस्पति भी लगाए जाएंगे। साथ ही यमुना किनारे एक ऐसा पथ तैयार किया जाएगा जहां लोग आसानी से साइकिल चला सकेंगे।
- पेड़ों की रक्षा के लिए एक विशेष वृक्ष निर्देशिका तैयार की जाएगी। इसमें उच्च कार्बन भंडारण व विरासत वृक्ष आदि को चिन्हित किया जाएगा।
लोगों ने कहा...
दिल्ली में प्रदूषण के लिए लोगों की गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं। लोग खुले में कचरा जला देते हैं। इससे काफी मात्रा में प्रदूषण फैल जाता है जबकि इस पर जुर्माना भी है। सरकार को ऐसे इलाकों की पहचान करनी चाहिए जहां अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं। रिहयाशी इलाकों को छोड़कर औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियां अधिक देखने को मिलती हैं।
-निखिल
यह स्पष्ट है कि घरों से भी प्रदूषण फैलता है। चाहे इसमें किचन का प्रदूषण हो या अन्य प्रदूषण। कई लोग अपने घरों का कचरा खुले में ही बाहर फेंक देते हैं या नाली या बड़े नालों में डाल जिम्मदेरी पूरी कर लेते हैं। इसके लिए कड़े नियम होने चाहिए। बड़े नालों को फेंसिंग कर बंद कर देना चाहिए, जिससे इस तरह की गतिविधियां न हो। साथ ही निगरानी समितियों को समय-समय पर कॉलोनियों का निरीक्षण कर दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना भी करना चाहिए।
-नेहा, गृहिणी
दिल्ली की औद्योगिक इकाइयों की वजह से भी सांसों पर संकट आता है। कई ऐसे औद्योगिक संयंत्र हैं जहां प्रदूषण मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कई बार निगरानी समितियां मौके पर पहुंचती हैं तो लेकिन सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी हो जाती है। पूर्व में कई ऐसी औद्योगिक इकाइयों को गैस चलित में तब्दील किया गया जो प्रदूषण फैला रही थी। प्रदूषण के स्तर को देखते हुए इसकी अभी भी जरूरत है। सरकार जितना जल्दी इसे कर देगी उतना ही लोगों के लिए बेहतर है।
-मुशर्रफ फहीम
यमुना के प्रदूषण के लिए मास्टर प्लान में बेहतर उपाय बताए गए हैं। यदि सरकार ईमानदारी से उपायों को धरातल पर उतारे तो हम यमुना को प्रदूषण मुक्त कर सकते हैं। क्योंकि, दिल्ली में पहले ही पानी की कमी है। पीने के पानी का बड़ा हिस्सा यमुना के पानी से पूरा किया जाता है। इसके गंदे होने से भी लोगों के लिए पीने के पानी का संकट का खड़ा हो जाता है। हालांकि, यमुना के प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्लीवासियों को भी अपने स्तर पर जागरूक होना होगा।
-मिस्बाह उर रहमान