व्यवसायिक सिलिंडर के दाम में भी 95.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह अब 1647.50 रुपये का हो गया है। ऑल इंडिया इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन आगरा संभाग के अध्यक्ष विपुल पुरोहित ने बताया कि 14.2 किलो के गैस सिलिंडर पर 25 रुपये बढ़े हैं, जिससे यह 832 रुपये का हो गया है। इससे जिले में 8.44 लाख कनेक्शनधारकों पर इसका बोझ पड़ेगा।
लगातार बढ़ा रहे दाम
राजपुर चुंगी निवासी आरती पाराशर ने कहा कि महंगाई से पहले से ही घर चलाना मुश्किल हो रहा है, सिलिंडर पर लगातार दाम बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार दामों में कमी करे।
रसोई का बजट बिगड़ा
कमला नगर निवासी ऊषा सिंघल ने कहा कि 30 दिन में सिलिंडर पर 125 रुपये बढ़ा दिए, इससे रसोई का बजट बिगड़ रहा है, कीमत कम कर राहत देनी चाहिए।
आमदनी सीमित, खर्च बढ़ रहे
बोदला-सिकंदरा रोड निवासी शशि ने कहा कि पेट्रोल और सिलिंडर हर घर की जरूरत है, इन पर तेजी से दाम बढ़ा दिए हैं, आमदनी सीमित है, घर का खर्च चलाने में मुश्किल हो रही है।
हिमाचल प्रदेश में रसोई गैस सिलिंडर के घरेलू उपभोक्ताओं को मार्च में 916 जबकि व्यावसायिक गैस सिलिंडर के लिए 1755 रुपये चुकाने पड़ेंगे। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की शिमला शहरी कमेटी ने सोमवार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पेयजल व्यवस्था के निजीकरण को लेकर प्रदर्शन किया। सीपीआईएम शिमला शहरी कमेटी के सचिव बलबीर पराशर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों से जनता परेशान है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं वहीं दूसरी ओर नगर निगम शिमला पानी और कूड़े के भारी भरकम बिल जारी कर रहा है। इसके अलावा शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था का निजीकरण भी किया जा रहा है। पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है। पार्टी के जिला सचिव संजय चौहान ने सरकार से शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण के निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि ऐसा न किया तो शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की नीतियों के खिलाफ संगठन जनता के साथ मिल कर आंदोलन चलाया जाएगा। प्रदर्शन में पार्टी जिला सचिव संजय चौहान, राज्य सचिवालय सदस्य डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, प्रेम गौतम, राज्य कमेटी सदस्य डॉ. राजेंद्र चौहान, विजेंद्र मेहरा, फालमा चौहान, जिला कमेटी सदस्य रीना तंवर, सत्यवान पुंडीर, बाबू राम, किशोरी डटवालिया, चंद्रकांत, विक्रम कायथ, पूर्व पार्षद राजीव ठाकुर, सोनिया और जगमोहन ठाकुर समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कीमत बढ़ने के बाद उत्तराखंड में अब घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमत 838.50 रुपये हो गई है। इससे पहले फरवरी में भी रसोई गैस की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी हुई थी। अब फिर से रसोई गैस के दाम बढ़ने से महिलाओं का बजट बिगड़ गया है। रसोई गैस की कीमतों में अचानक इतनी बढ़ी वृद्धि से महिलाएं परेशान हैं।
हर महीने रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी कर सरकार लोगों की कमर तोड़ने का काम कर रही है। फरवरी से अभी तक चार बार गैस सिलिंडर की कीमतों में उछाल आने से रसोई का बजट बिगड़ गया है।
- रीना अग्रवाल, गृहिणी
लगातार गैस सिलिंडर की कीमतों में वृद्धि से महिलाओं को परेशानी हो रही है। महंगाई के चलते घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन सरकार महंगाई को काबू करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।
- अनीता गुप्ता, गृहिणी
रसोई गैस के दाम तो लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन सब्सिडी कितनी मिलेगी, इसका किसी को कुछ पता नहीं है। कीमतों में इतना भारी उछाल आना परेशान करने वाला है। सब्सिडी तो नाम मात्र की रह गई है।
- अनामिका शर्मा, गृहिणी
रसोई गैस के दामों में लगातार वृद्धि कर सरकार महिलाओं और गरीब परिवारों की उपेक्षा कर रही है। महीने की शुरुआत में ही गैस सिलिंडर के दामों को बढ़ाकर महिलाओं का बजट बिगाड़ने का काम किया है।
- सविता वर्मा, गृहिणी
नए दाम लागू होने के बाद चंडीगढ़ में 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलिंडर 828.50 रुपये में मिलेगा। गैस एजेंसी संचालक नवदीप सिंह ने बताया कि दिसंबर में रसोई गैस की कीमत करीब 603 रुपये थी। तब से लेकर अब तक 225 रुपये बढ़ चुके हैं। लगातार बढ़ते दाम से आम लोग परेशान हैं। उन्हें राहत की उम्मीद थी लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी। पेट्रोल-डीजल के लगातार दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि दूसरी चीजों के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।
अच्छे दिन के नाम पर जनता को छला
सरकार ने अच्छे दिन का सपना दिखाकर जनता के साथ धोखा किया है। गरीब और गरीब होता जा रहा है। सरकार ने सत्ता में आने से पहले गरीब को ऊपर उठाने की बात की थी लेकिन सरकार ने उन्हें नीचे गिराया है। सरकार की हर नीति का सीधा असर मध्यम वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है, जो कर भी अदा करते हैं। - अमनदीप कौर, सेक्टर 26।
कैसी सरकार... परेशानी खत्म करने के बजाय बढ़ा रही
सिलिंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता पर बोझ बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच महीनों से एलपीजी सब्सिडी को बिना किसी कारण के रोक दिया गया है। यह गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों के लिए एक बड़ी समस्या है। सरकार आम जनता की परेशानियों को खत्म करने के बजाए बढ़ा रही है। - सुनीता शर्मा, प्रेसिडेंट आरडब्ल्यूए, सेक्टर- 47।
रसोई पर रहम करो
पीएम मोदी को रसोई पर दया करनी चाहिए। कोरोना के बाद सरकार जनता को एक के बाद एक नया झटका दे रही है। यह गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी समस्या है। दिसंबर से लेकर अब तक एलपीजी गैस में 225 रुपये प्रति सिलिंडर कीमत बढ़ी है। बिना रोजगार के इतनी महंगाई में आम जनता कैसे अपना गुजारा करेगी। -शिखा, सेक्टर- 27, आरडब्ल्यू सलाहकार।