सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. धीरेन गुप्ता का कहना है कि बच्चों में भी व्यस्कों की भांति संक्रमण का खतरा है लेकिन एक राहत यह भी है कि इन बच्चों में असर काफी कम है। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आ रही है और न ही इन्हें ऑक्सीजन इत्यादि की आवश्यकता पड़ रही है।
दिल्ली में व्यस्कों की तरह बच्चों में भी कोरोना संक्रमण के मामले देखने को मिल रहे हैं। राजधानी के अलग अलग अस्पतालों में संक्रमित बच्चे उपचाराधीन हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस वक्त देश की राजधानी का मौसम भी बच्चों के अनुकूल नहीं है। आमतौर पर इस मौसम में बच्चे निमोनिया इत्यादि की चपेट में भी आ जाते हैं।
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जानकारी के अनुसार एम्स के अलावा सफदरजंग, कलावती सरन, लोकनायक, पूर्वी दिल्ली के चाचा नेहरू सहित प्राइवेट अस्पतालों में एक वर्ष से भी कम आयु के बच्चे उपचाराधीन हैं। कोरोना संक्रमण इसी तरह का असर सभी आयुवर्ग में दिखा रहा है। हालांकि एक वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों में परेशानी जल्दी पता चल जाती है। एम्स में तीन, कलावती में 16 संक्रमित बच्चे भर्ती हैं। इनमें से दो बच्चे ऑक्सीजन थैरेपी पर हैं। इसी तरह सर गंगाराम अस्पताल में 10 बच्चे उपचाराधीन हैं। इनके अलावा चाचा नेहरु और लोकनायक अस्पताल को मिलाकर पांच बच्चे उपचाराधीन हैं। वहीं मैक्स, रैनबो, मूलचंद और फोर्टिस अस्पताल में भी संक्रमित बच्चों का उपचार चल रहा है।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. धीरेन गुप्ता का कहना है कि बच्चों में भी व्यस्कों की भांति संक्रमण का खतरा है लेकिन एक राहत यह भी है कि इन बच्चों में असर काफी कम है। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आ रही है और न ही इन्हें ऑक्सीजन इत्यादि की आवश्यकता पड़ रही है। इसलिए लोगों को अपने बच्चों को लेकर पैनिक नहीं होना चाहिए लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनकी लापरवाही के चलते संक्रमण का जोखिम बच्चों के लिए भी बढ़ सकता है। इसलिए कोविड सतर्कता नियमों का पालन पूरे परिवार को करना चाहिए।
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रेनबो चिल्ड्रन अस्पताल की डॉ. अनामिका दुबे ने बताया कि हर साल सर्दियों में छोटे बच्चों को दिक्कतें होती हैं। इस वक्त दिल्ली में कोरोना संक्रमण फैला हुआ है। ऐसे में इनका जोखिम और बढ़ जाता है लेकिन अभी तक की स्थिति से यह लगता है कि बच्चों में कोरोना का असर बहुत अधिक गंभीर नहीं है। जिन बच्चों में लक्षण दिखाई भी दे रहे हैं वे तीन से चार दिन में रिकवर भी हो जा रहे हैं। हालांकि इस बीच बच्चे थोड़ा बहुत परेशान जरूर होते हैं और उनको इसी परेशानी से बचाने के लिए माता पिता को संक्रमण से बचाव के नियम मानने चाहिए।