एलजी ने इसमें पूर्व में भेजे गए सभी पत्रों के विषयों का उल्लेख किया है। इसमें आबकारी नीति का मुद्दा, फाइलों पर हस्ताक्षर न करने, स्कूलों के निर्माण में अनियमितता बरतने, विभागों का समय पर ऑडिट नहीं कराने, पर्यावरण विभाग द्वारा पेड़ों के ट्रांसलोकेशन की फाइलों को रोकने, दिल्ली जल बोर्ड का टेंडर निजी वेंडर को देने, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों के खर्चों का ऑडिट नहीं करने, दिल्ली सरकार के स्कूलों में वर्षों से पड़े खाली पदों को नहीं भरने, बिजली सब्सिडी का मामला, दिल्ली जल बोर्ड के सफाई कर्मियों के वेतन का भुगतान नहीं करने व गांधी जयंती के मौके पर बापू की समाधि पर दिल्ली सरकार के किसी प्रतिनिधि के मौजूद नहीं होने जैसे विषयों का उल्लेख है। उन्होंने कहा है कि यह सभी गंभीर विषय दिल्ली सरकार के विभागों से संबंधित हैं। सीएम और उनके सहयोगी पहले बेबुनियाद आरोप लगाते हैं और बाद में भाग खड़े होते हैं।
एलजी ने कहा है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पंजाब के पूर्व मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया के मामले में ऐसे ही अनरगल आरोप लगाया और बाद में मांफी मांगी। उनके खिलाफ भी ऐसा किया गया, जिसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उनपर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं, इसलिए मीडिया और सोशल मीडिया से भी एलजी के खिलाफ ऐसे सारे आरोप हटाए जाएं।