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Delhi: एलजी ने केजरीवाल को पत्र लिख नाराजगी की जाहिर, ट्वीट कर बोले सीएम- 'आज एक और लव लेटर आया है'

Sat, 08 Oct 2022 02:01 PM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उपराज्यपाल ने अरविंद केजरीवाल को छह पन्नों का पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके मंत्री मर्यादा लांघ रहे हैं, वे संवैधानिक कर्तव्यों और शासन की जिम्मेदारियों से पीछे भाग रहे हैं।
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उपराज्यपाल वीके सक्सेना और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली सरकार के बीच लगातार घमासान जारी है। अब उपराज्यपाल ने अरविंद केजरीवाल को छह पन्नों का पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके मंत्री मर्यादा लांघ रहे हैं, वे संवैधानिक कर्तव्यों और शासन की जिम्मेदारियों से पीछे भाग रहे हैं। उधर, अरविंद केजरीवाल ने एलजी के पत्र को लेकर ट्वीट करते हुए लिखा, 'आज एक और लव लेटर आया है।'

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उपराज्यपाल वी के सक्सेना के पत्रों को सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा बार-बार प्रेम पत्र कहकर संबोधित करने पर एलजी ने उन्हें कर्तव्य पत्र भेजकर अपने कर्तव्यों से अवगत कराया। एलजी ने इसमें अफसोस जताते हुए लिखा है कि उन्होंने संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सीएम को उनकी कमियों से अवगत कराया और उनके निवारण का अनुरोध किया। लेकिन वो और उनके सहयोगियों ने इनका जवाब देने के बजाय न केवल लोगों को गुमराह किया बल्कि उनपर तथ्यहीन व व्यक्तिगत आक्षेप लगाए। एलजी ने सीएम को याद दिलाया कि उन्होंने आम नागरिकों की भलाई और सुशासन से जुड़े विषयों को उठाया था। दिल्ली के संवैधानिक अभिभावक के रूप में यह उनका कर्तव्य है कि वह दिल्ली वासियों की शिकायतों के निवारण के लिए सदैव उचित कदम उठाएं। 

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनकी पार्टी के नेताओं के भ्रामक बयानों को संज्ञान में लेने के लिए कहा और दुख जताया कि मुख्यमंत्री व उनके सहयोगी मर्यादा की सीमाएं लांघने के अलावा संवैधानिक कर्तव्यों और शासन की जिम्मेदारियों से पीछे हट रहे हैं। दिल्ली सरकार विज्ञापनों और भाषणों के बल पर चल रही है और शासन व्यवस्था और जनहित के मौलिक कार्यों से मुंह मोड़ लिया है। उपराज्यपाल ने कहा कि भारत का संविधान, संसद द्वारा बनाए गए कानून और न्यायालयों द्वारा समय समय पर लिए गए निर्णय उन्हें उनकी जिम्मेदारियों के लिए सशक्त और बाध्य करते हैं। इसलिए उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सीएम को कई बार कर्तव्य पत्र लिखे। 
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एलजी ने इसमें पूर्व में भेजे गए सभी पत्रों के विषयों का उल्लेख किया है। इसमें आबकारी नीति का मुद्दा, फाइलों पर हस्ताक्षर न करने, स्कूलों के निर्माण में अनियमितता बरतने, विभागों का समय पर ऑडिट नहीं कराने, पर्यावरण विभाग द्वारा पेड़ों के ट्रांसलोकेशन की फाइलों को रोकने, दिल्ली जल बोर्ड का टेंडर निजी वेंडर को देने, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों के खर्चों का ऑडिट नहीं करने, दिल्ली सरकार के स्कूलों में वर्षों से पड़े खाली पदों को नहीं भरने, बिजली सब्सिडी का मामला, दिल्ली जल बोर्ड के सफाई कर्मियों के वेतन का भुगतान नहीं करने व गांधी जयंती के मौके पर बापू की समाधि पर दिल्ली सरकार के किसी प्रतिनिधि के मौजूद नहीं होने जैसे विषयों का उल्लेख है। उन्होंने कहा है कि यह सभी गंभीर विषय दिल्ली सरकार के विभागों से संबंधित हैं। सीएम और उनके सहयोगी पहले बेबुनियाद आरोप लगाते हैं और बाद में भाग खड़े होते हैं। 

एलजी ने कहा है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पंजाब के पूर्व मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया के मामले में ऐसे ही अनरगल आरोप लगाया और बाद में मांफी मांगी। उनके खिलाफ भी ऐसा किया गया, जिसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उनपर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं, इसलिए मीडिया और सोशल मीडिया से भी एलजी के खिलाफ ऐसे सारे आरोप हटाए जाएं। 
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