हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने भी डीटीसी के लिए एक हजार लो-फ्लोर बस खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ एकतरफा आदेश देने का निर्देश देने से इंकार कर दिया। दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत ने गुप्ता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने विधायक गुप्ता से कहा कि वह एकल पीठ के समक्ष होने वाले की अगली सुनवाई से पहले इससे संबंधित कोई ट्वीट या प्रेस विज्ञप्ति जारी न करें। वहीं गुप्ता के वकील ने ऐसा न करने का आश्वासन दिया।
दिल्ली सरकार मंत्री गहलोत ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर दो सदस्यीय पीठ से एकल पीठ को एकतरफा आदेश पारित करने का निर्देश देने की मांग की थी। पीठ ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई के दिन कोई भी स्थगन की मांग नहीं करेंगे। उन्होंने एकल पीठ से भी आग्रह किया कि वह सुनवाई स्थगित नहीं करें। मामले में एकल पीठ के समक्ष 20 सितंबर को सुनवाई तय है।
हाल ही में न्यायमूर्ति आशा मेनन ने भाजपा के विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ मानहानि की शिकायत में सोशल मीडिया पर कथित रूप से पोस्ट डालने पर एक पक्षीय निर्णय देने से इनकार कर दिया था। विजेन्द्र गुप्ता ने मंत्री गहलौत के खिलाफ दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के लिए एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद में कथित अनियमितताओं के संबंध में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
एकल पीठ ने कहा था मामले में स्विट्जरलैंड में कुछ अचल संपत्ति के खरीद में हाथ होने के आरोप लगाए गए थे, जबकि वर्तमान मामले में प्रथम दृष्टया कोई व्यक्तिगत आरोप विशेष रूप से विधायक गुप्ता के खिलाफ नहीं लगाए गए हैं। इसलिए इस स्तर पर कोई एक पक्षीय निर्णय नहीं दिया जा सकता।
कैलाश गहलोत ने विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ मानहानि के अलावा उनके खिलाफ किए गए सभी ट्वीट, पोस्ट को उनके ट्विटर अकाउंट से तुरंत डिलीट करने की मांग की है। गहलोत ने आरोप लगाया है कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी गुप्ता ने एक उच्चस्तरीय समिति की तरफ से क्लीन चिट दिए जाने के बावजूद लो फ्लोर बसों की खरीद के संबंध में मंत्री पर संदेह करते हुए बेरोकटोक ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा दिल्ली सरकार ने बसों के लिए टेंडर जारी किया, उचित प्रक्रिया के बाद ही टेंडर जारी किए गए और विजेन्द्र गुप्ता ने बिना आधार के आरोप लगाए हैं।