राजधानी दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में जज के सामने ही टॉप मोस्ट गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी हत्याकांड की पटकथा 10 दिन पहले ही मंडोली जेल में लिख ली गई थी। 15 सितंबर को टिल्लू ताजपुरिया से मिलने उसके गुर्गे मंडोली जेल में पहुंचे थे। वहां टिल्लू ने अपने लड़कों को गोगी की हत्या का प्लान बताया था। टिल्लू के कहने पर ही प्लान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगातार चार दिन कोर्ट की रैकी कर पांचवे दिन वारदात को अंजाम दे दिया गया।
अदालत के सभी गेट पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इसके बाद फैसला हुआ कि गेट नंबर-4 से अंदर दाखिल होकर वकील के कपड़ों में कोर्ट रूम में पहुंचा जाएगा। हुआ भी ऐसा ही बदमाश अपने मकसद में कामयाब हुए और इन्होंने योजना के तहत गोगी की हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गोगी की हत्या के बाद विरोधी टिल्लू खेमे में खुशी का माहौल है। पिछले कई सालों से टिल्लू लगातार गोगी की हत्या की योजना ही बना रहा था।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि 15 सितंबर को मंडोली जेल में टिल्लू से मिलने के लिए उमंग और विनय के अलावा कुछ और भी लोग थे। वहां मुलाकात के दौरान टिल्लू ने इनको अपना प्लान समझाया। योजना के तहत शूटरों के रुकने की व्यवस्था उमंग ने अपने घर में की। यहां से रोहिणी कोर्ट ढाई से तीन किलोमीटर के बीच है। ऐसे में यहां से आना-जाना आसान था।
20 सितंबर के बाद उमंग, विनय, राहुल और जगदीप लगातार 3 से 4 घंटे कोर्ट की रैकी कर रहे थे। इनको पता था कि अदालत के कमरा नंबर-207 में ही गोगी की पेशी होनी है। गोगी किसी भी सूरत में जिंदा न रहे, इसलिए शूटरों को आदेश था कि वह दोनों ओर से गोगी पर फायर करें। सब कुछ साजिश के तहत हुआ। घटना वाले दिन उमंग शूटर राहुल व जगदीप को लेकर कोर्ट के गेट नंबर-4 से ही दाखिल हुआ। काफी देर वह पार्किंग में ही मौजूद रहा। जब कोर्ट रूम में गोलियां चलने की आवाज आई तो उमंग वहां से भाग निकला और सीधा अपने घर पहुंचा।