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उपहार सिनेमा अग्निकांड: अदालत को झूठी जानकारी देने पर जांच अधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी कर जवाब मांगा

Mon, 21 Feb 2022 08:44 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

पुलिस ने 31 जनवरी को अदालत को बताया था कि मंजूरी की मांग करने वाला उसका आवेदन एलजी के कार्यालय के समक्ष लंबित है और दस्तावेजों को पेश करने के लिए समस मांगा था। अदालत ने मंजूरी हासिल करने के लिए जांच अधिकारी को तीन सप्ताह का समय दिया था।
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अदालत ने 1997 के उपहार सिनेमा आग मामले में दोषी सुशील अंसल पर मुकदमा चलाने की मंजूरी के संबंध में कथित रूप से भ्रामक बयान देने के लिए दिल्ली पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि अंसल ने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने के दौरान धोखाधड़ी की है। मामले में शिकायतकर्ता नीलम कृष्णामूर्ति ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी के संबंध में अदालत को गुमराह किया है।

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मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने शिकायतकर्ता द्वारा दायर एक आवेदन पर मामले के जांच अधिकारी (आईओ) को नोटिस जारी किया। याची ने अदालत को बताया कि उपराज्यपाल ने पिछले साल 16 सितंबर को पहले ही आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है, जिसे डीसीपी मुख्यालय को विधिवत सूचित किया गया था। वहीं जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मंजूरी संबंधी आवेदन लंबित है। अदालत ने मामले की सुनवाई 4 मार्च तय की है।

पुलिस ने 31 जनवरी को अदालत को बताया था कि मंजूरी की मांग करने वाला उसका आवेदन एलजी के कार्यालय के समक्ष लंबित है और दस्तावेजों को पेश करने के लिए समस मांगा था। अदालत ने मंजूरी हासिल करने के लिए जांच अधिकारी को तीन सप्ताह का समय दिया था। शिकायतकर्ता और उपहार त्रासदी पीड़ित एसोसिएशन (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने दायर आवेदन में कहा कि 14 फरवरी 2022 को उनके द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन के जवाब से परस्पर विरोधी विवरण सामने आए हैं। 
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एवीयूटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने बताया कि अदालत में दायर आरोप पत्र केवल धारा 177 (झूठी सूचना देना), 181 (जानबूझकर एक लोक सेवक को शपथ पर सच है कि जो गलत है) के तहत दायर किया गया है। जबकि, 22 मई 2020 को एलजी के कार्यालय में दायर चार्जशीट का मसौदा धारा 420 (धोखाधड़ी), 177, 181, 192 (देने) के तहत था। या झूठे सबूत गढ़ना), 197 (झूठा प्रमाण पत्र जारी करना) आईपीसी की धारा 12 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12। के तहत है।

उन्होंने अदालत से कहा यह जानकर हैरानी होती है कि जब आरोप पत्र वास्तव में अदालत में दायर किया गया था तो इस तरह की महत्वपूर्ण धाराओं को कैसे हटा दिया गया। पुलिस ने पहले अपने आरोप पत्र में अदालत को बताया था कि अंसल ने अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने के दौरान अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाकर अधिकारियों के साथ धोखाधड़ी की। पुलिस ने अपनी आठ पेज की अंतिम रिपोर्ट में दावा किया था कि अंसल ने शपथ पर सरकारी प्राधिकरण को गुमराह किया कि उन्हें किसी भी अदालत द्वारा किसी भी आपराधिक कार्यवाही में दोषी नहीं ठहराया गया है।

कृष्णमूर्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अंसल ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए अधिकारियों को गलत जानकारी दी या गलत जानकारी दी। हालांकि, अंसल ने 14 अगस्त, 2017 को अपना पासपोर्ट सरेंडर कर दिया, क्योंकि वह जानता था कि उसके खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित किया जा सकता है। हादसे में दो बच्चों को खोने वाले कृष्णमूर्ति पिछले 20 साल से पीड़ित परिवारों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अंसल हर 5-10 साल में अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण करवा रहा था। पास्पोर्ट नियमों के तहत पास्पोर्ट के नवीनीकरण के समय यह बताना जरूरी है कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा विचाराधीन तो नहीं है और क्या उसे किसी मामले में सजा मिली है।

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