'डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 के केंद्र में आम नागरिक हैं। आचार संहिता का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखते हुए ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को बनाए रखना है।' यह बात सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विक्रम सहाय ने भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा 'डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021' विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में कही।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल मीडिया की भूमिका काफी बढ़ी है। पिछले छह साल के दौरान इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल 43 गुना तक बढ़ चुका है। भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ ओटीटी मार्केट है। वर्ष 2024 तक इस मार्केट के 28.6 फीसदी की वार्षिक वृद्धि के साथ 2.9 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ समय से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जाने वाले कंटेट को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके कारण डिजिटल मीडिया आचार संहिता बनाई गई।
सहाय के मुताबिक, भारत में 35 वर्ष से कम आयु के लोग ऑनलाइन समाचार पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इन न्यूज वेबसाइ्टस पर लोग 41 फीसदी ज्यादा समय बिता रहे हैं। समाचार पत्रों के लिए भारतीय प्रेस परिषद और टीवी न्यूज के के लिए केबल टीवी नेटवर्क अधिनियम, 1995 जैसे कंटेंट रेगुलेटर्स हैं, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाचारों के लिए ऐसा कोई विनियमन नहीं है। ओटीटी के मामले में भी कुछ ऐसा ही है।
संयुक्त सचिव ने स्पष्ट किया कि डिजिटल मीडिया आचार संहिता का उद्देश्य महिलाओं के लिए आपत्तिजनक एवं बच्चों के लिए हानिकारक सामग्री के प्रसारण पर अंकुश लगाना है। इसके लिए समाचार प्रकाशकों, ओटीटी प्लेटफॉर्म और कार्यक्रम प्रसारकों को अपने यहां एक शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और इन शिकायतों की जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी। समाचार प्रकाशकों को एक नियामक संस्था का सदस्य भी बनना होगा, ताकि कार्यक्रम से संबंधित शिकायतों का निपटारा हो सके। इसके अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय एक अंतर-मंत्रालय समिति का गठन करेगा, जो समाचार प्रकाशक या नियामक संस्था द्वारा न सुलझाई गई शिकायतों का निपटारा करेगी।
कार्यक्रम में संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरपाड, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा एवं आईआईएमसी के डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह भी मौजूद थे।