दिल्ली के आईटीओ यमुना घाट पर भगवान श्रीगणेश जी की मूर्ति विसर्जित करने पहुंचे श्रद्धालु।
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नई दिल्ली। प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश के दस दिवसीय गणेशोत्सव का रविवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर समापन हो गया। भक्ति भाव से बप्पा की मूर्ति को विसर्जित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल के साथ विघ्नहर्ता का गुणगान किया। देवा ओ देवा, गणपति देवा...। गणपति बप्पा मोरया... अगले बरस तू जल्दी आ...के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने बप्पा को विदाई दी। अधिकतर भक्तों ने घरों में टब या ड्रम में पानी भरकर मूर्ति विसर्जन किया। आस्था का सैलाब यमुना घाटों पर भी नजर आया। आईटीओ पुल और उसके आसपास के इलाकों में लोगों को मूर्ति विसर्जित करते देखा गया।
सुबह से ही मूर्ति विसर्जन का कार्यक्रम शुरू हो गया था और दोपहर तक रहा। उल्लास के साथ गणेश जी की मूर्ति को लेकर लोग बाइकों, कारों और अन्य वाहनों से यमुना घाटों पर पहुंचे। लाजपत नगर में श्रीगणेश उत्सव न्यास समिति और धर्मसेवा युवा मंडल ने संत रामकंवर मंदिर जल विहार में दस दिन तक गणेश महोत्सव का आयोजन किया। रविवार सुबह गणपति बप्पा की मूर्ति का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया। सुबह गणपति पूजन, आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
आयोजन समिति की प्रमुख मंजू धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि दस दिन तक श्रद्धालुओं ने सुबह-शाम बप्पा के भजनों का भरपूर आनंद लिया। अगले साल फिर से गणपति मूर्ति स्थापना की कामना के साथ सुबह यज्ञ, पूजन व 1008 पूर्णाहुति की गई। इसके बाद बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया गया।
गणेश के कान में बोली अपनी मनोकामना
यमुना के आईटीओ घाट पर पुलिस की निगरानी में ही लोगों ने मूर्ति विसर्जन किया। लोग यमुना में मूर्ति विसर्जन करने ना आएं, इसके लिए घाटों पर पुलिस तैनात थी, लेकिन आस्था के आगे पुलिस ने नरमी दिखाई। विसर्जन करने से पहले कई युवतियां गणपति की मूर्तियों के कान में अपनी मनोकामना बोलती नजर आईं। हालांकि, घाटों पर ज्यादा भीड़ नहीं थी।