एक महिला और उसके दो नाबालिग बच्चों ने कोविड़ महामारी के दौरान हुई पति-पिता की मौत पर पूरी बीमा राशि का भुगतान न करने संबंधी एक बीमा कंपनी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने याचिका पर दिल्ली सरकार व बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दिल्ली सरकार, इरडा के अलावा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
फोर्टिस अस्पताल में ही पिछले साल महिला के पति की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अदालत ने सभी पक्षों को चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 12 दिसंबर तय की है।
दिल्ली निवासी सुनीता गोयल और उनके दो नाबालिग बच्चों द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि उनके पति ने बीमा कंपनी की एक मेडिक्लेम पॉलिसी 'परिवार मेडिक्लेम पॉलिसी' ली थी और इसमें बीमा राशि पांच लाख रुपये थी।
अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि महिला के पति गुलशन कुमार गोयल जून 2020 के अंतिम हफ्ते में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे और उन्हें 30 जून को शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सात जुलाई 20 को उनकी मौत हो गई थी।
याचिका में दावा किया गया है कि अस्पताल ने इलाज का 5.33 लाख रुपये का बिल बनाया जिसे उसे देना पड़ा क्योंकि बीमा कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया और निर्धारित बीमा राशि तक अस्पताल का खर्च देने की जिम्मेदारी उठाने से इनकार कर दिया। अस्पताल ने बाद में 1.95 लाख रुपये इस आधार पर लौटा दिए कि ये अतिरिक्त राशि थी।
याचिका के अनुसार बाद में बीमा कंपनी के केवल 1.31 लाख रुपये देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा तय की गई दरों के अनुसार कुल बिल 1.44 लाख रुपये होना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं ने बीमा कंपनी और अस्पताल से 25 लाख रुपये का मुआवजा भी मांगा है। परिवार ने बीमा कंपनी को अस्पताल का बिल भरने का निर्देश देने या एक विकल्प के तौर पर अस्पताल से उनका पैसा लौटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
याचिका में इरडा को भी निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि बीमा शर्तो का उल्लंघन करने पर संबंधित बीमा कंपनी के खिलाफ कारवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से न भागे। इसके अलावा दिल्ली सरकार को भी संबंधित अस्पताल के खिलाफ तय सर्कुलर का उल्लंघन कर ज्यादा बिल बनाने पर कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।