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हाईकोर्ट ने बताया : लिव-इन में खर्च एक कर रहा है या दोनों, नहीं है अपराध

Sun, 19 Sep 2021 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने ऐसे ही एक मामले में युवती के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसके साथी ने खर्च वहन करने के लिए दवाब बनाया। अदालत ने युवती द्वारा अपने साथी पर लगाए गए दुष्कर्म मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।
 
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दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले साथियों में खर्च का वहन एक करे या दोनों मिलकर यह कोई आपराधिक मामला नहीं बनता। अदालत ने ऐसे ही एक मामले में युवती के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसके साथी ने खर्च वहन करने के लिए दवाब बनाया। अदालत ने युवती द्वारा अपने साथी पर लगाए गए दुष्कर्म मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।

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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने युवती के उस बयान पर असहमति जताई कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान उसने आरोपी के दवाब पर साथ रहने के दौरान एक लाख 25 हजार रुपये खर्च किए।

अदालत ने कहा लिव-इन रिलेशनशिप में जहां दोनों साथी एक साथ रह रहे हैं, ऐसा नहीं है कि केवल एक साथी को खर्च वहन करना पड़ता है और यदि खर्च युवती द्वारा वहन किया जाता है या दोनों खर्च वहन करते हैं तो यह एक अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
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पेश मामले में युवती ने शिकायत दर्ज करवाई कि सितंबर 2017 में वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आई थी, उसी दौरान उसकी मुलाकात राहुल कुश्वाह से हुई थी। आरोप है कि राहुल ने पीड़िता पर उसके माता-पिता को शादी के लिए मनाने का दबाव बनाया। बाद में उसके माता-पिता अगस्त 2019 में शादी के लिए सहमत हो गए। युवती ने आरोप लगाया कि राहुल ने उसकी इच्छा के विपरीत शारीरिक संबंध बनाए कि उसके माता-पिता उनकी शादी के लिए सहमत हो गए थे। युवती ने कहा जब वह किसी चीज से इंकार करती थी तो वह उसके साथ मारपीट करता था।

युवती ने कहा वह सभी खर्च वहन करती थी जो लगभग एक लाख 25 हजार था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौते के एवज में राशि वापस कर दी गई। इसके तुंरत बाद युवती ने दुष्कर्म के आरोप में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करवा दी।

अदालत ने कहा युवती के बयानों से ही यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता राहुल और वह दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में थे और दोनों ने अपने परिवारों को शादी के लिए राजी किया और शुरू में युवती का परिवार विवाह से सहमत नहीं था। हालांकि बाद में उसके पिता विवाह के लिए सहमत हो गए, लेकिन विवाह क्यों नहीं हुआ इसका कोई कारण नहीं बताया गया।

अदालत ने युवती के मारपीट संबंधी बयानों पर संदेह जताते हुए कहा कि न तो कोई शिकायत है और न ही एमएलसी जिससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता उसके साथ मारपीट करता था। अदालत ने स्पष्ट किया कि लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए वे आरोपी राहुल की जमानत 25 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार करती है।

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