हाईकोर्ट ने कहा है कि जब माता-पिता के बीच के रिश्ते खराब हो जाते है और वे अलग रहने लगते है तो अक्सर ऐसे मामलों में देखा जाता है कि बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को उनकी पसंद के स्कूल में पढ़ने की मंजूरी मिलनी चाहिए ताकि उन्हें अपने बचपन के सपने को जीने का मौका मिल सके। विशेषकर इस कोविड प्रोटोकॉल के समय में।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने यह फैसला एक बच्चे की मां की याचिका पर फैमली कोर्ट के उस फैसले को खारिज करते हुए दिया जिसमें बच्चें को यूके के चार्टर हाउस स्कूल में दाखिला प्रदान करने से मना कर दिया था। दरअसल दोनों पति-पत्नी आपसी विवाद के चलते अलग रह रहे है और पति ने छोटे बच्चे का भी यूके में दाखिले पर आपत्ति जताई थी और फैमली कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया था। 13 वर्षीय बच्चे का बड़ा भाई उक्त स्कूल में ही पढ़ रहा है।
अदालत ने बच्चे की मां की और से पेश अधिवक्ता के तर्को को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि उक्त बच्चे को भी उसी स्कूल में दाखिला प्रदान किया जाता है तो यह न केवल दोनों बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए अनुकूल होगा बल्कि उनके सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक कल्याण में भी योगदान देगा।
अदालत ने कहा कि अधिवक्ता का यह तर्क भी उचित है कि दोनों पार्टियों के अलग होने के बाद दोनों बच्चों के अकादमिक प्रदर्शन में गिरावट आई है। अदालत ने दोनों पक्षों के रवैये पर दुख जताते हुए कहा मैं पीड़ा के साथ पालन करने के लिए विवश हूं, अक्सर ऐसे मामलों में देखा जाता है जहां माता-पिता अलग होते हैं, जिससे बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।अदालत ने कहा दुर्भाग्य से वर्तमान मामले में माता-पिता अपने मतभेदों को हल करने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण बच्चों को इस अलगाव का खामियाजा भुगतना पड़ा है, भावनात्मक और शैक्षणिक दोनों रूप से। हालांकि, यह उत्साहजनक है कि शुरुआती समस्याओं के बाद चार्टरहाउस स्कूल में बड़े बेटे के प्रदर्शन में वास्तव में सुधार हुआ है।
अदालत ने कहा वास्तव में माता-पिता के अलग होने के तुरंत बाद उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में यह गिरावट आम तौर पर तेज होती है, और समय बीतने के साथ जैसा कि वर्तमान मामले में देखा गया है बच्चे समायोजित होने लगते हैं। इससे न केवल उनके भावनात्मक स्वास्थ्य में सुधार होता है बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार होता है।
अदालत ने कहा मेरे विचार में जब माता-पिता के बीच के रिश्ते खट्टे हो गए हैं, तो यह वास्तव में बच्चों के सर्वोत्तम हित में होगा कि उन्हें चार्टर हाउस स्कूल में पढ़ने के लिए अपने बचपन के सपने को जीने का मौका दिया जाए।
अदालत ने सभी तथ्यों की समीक्षा करने के बाद कहा वर्तमान मामले में भले ही बड़े बेटे के शैक्षणिक प्रदर्शन में शुरू में गिरावट आई खासकर 2019 और 2020 के बीच, लेकिन 2021 में, उन्होंने एक उल्लेखनीय सुधार दिखाया है।
अदालत ने छोटे बेटे के वर्तमान स्कूल वसंत वैली स्कूल का हवाला देते हुए कहा उसका अकादमिक प्रदर्शन खराब हुआ है, बल्कि वास्तव में, उक्त स्कूल में उसके शिक्षकों ने यह देखते हुए कि वह एक अच्छा व्यवहार करने वाला और सम्मानित छात्र है। शिक्षकों ने कहा कि उसे और अधिक गंभीर होने की आवश्यकता है।
अदातल ने कहा वसंत वैली स्कूल के शिक्षकों की टिप्पणियों के आलोक में उक्त छात्र के हित में होगा कि उसका वातावरण बदल जाए, ताकि उसे अपनी वास्तविक क्षमता तक पहुंचने में सक्षम बनाया जा सके और ऐसा करने के लिए, यह अवसर अपने बड़े भाई के साथ चार्टरहाउस स्कूल में पढ़ना, जो न केवल उक्त संस्थान में अच्छी तरह से बस गया है, बल्कि अपने प्रदर्शन में एक उल्लेखनीय सुधार भी दिखाया है। अदालत ने कहा इसके अलावा एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने के बाद उसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना आसान हो जाएगा। यानी ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, हार्वर्ड में।
अदालत ने कहा चार्टरहाउस स्कूल 400 साल पुराना स्कूल है जिसे इंडिपेंडेंट स्कूल इंस्पेक्टरेट (आईएसआई) से हाल ही में %गोल्ड% मानक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जो ब्रिटेन के राज्य सचिव द्वारा अनुमोदित एक स्वतंत्र स्कूल निकाय है। ब्रिटेन के सरे में चार्टरहाउस स्कूल के 250 एकड़ के परिसर में विश्व स्तरीय प्रयोगशालाएं, 14 घास फुटबॉल पिच, 9 क्रिकेट वर्ग, एक गोल्फ कोर्स और एक पुरस्कार विजेता खेल केंद्र भी हैं। इसके अलावा चार्टरहाउस स्कूल यूनाइटेड किंगडम के पांच बोर्डिंग स्कूलों में से एक है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए फैमिली कोर्ट ने सही तथ्यों व बच्चों भविष्य को नजरअंदाज किया है और वे उस फैसले को खारिज कर रही है।