फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा- हिरासत में हिंसा का मामला है अंकित की मौत, तिहाड़ में हुई थी हत्या

Fri, 03 Sep 2021 05:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • इस घटना में जेल अधिकारियों द्वारा जबरन वसूली का एक बड़ा मुद्दा शामिल
  • कहा हर मामले में परिवार से पैसे की उगाही की जाती है, यह अत्यंत गंभीर मामला
  • कहा मृतक के साथ जो हुआ है वह दूसरों के साथ भी हुआ होगा
विज्ञापन
अंकित गुर्जर मौत मामला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल में मारे गए कैदी अंकित गुर्जर मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने कहा मृतक के शरीर पर चोटें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यह हिरासत में हुई हिंसा का मामला है। अदालत ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने के मुद्दे पर दायर पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष सीबीआई जांच करवाने की मांग को लेकर गुर्जर के परिवार के सदस्यों ने याचिका दायर की थी। अदालत ने कहा कहा कि इस घटना में जेल अधिकारियों द्वारा जबरन वसूली का एक बड़ा मुद्दा शामिल है। अदालत ने कहा जिस क्षण एक फोन (मृतक से) बरामद हुआ उस समय जेल अधिकारी पैसे मांग रहा है। अदालत ने कहा हर मामले में परिवार से पैसे की उगाही की जाती है, यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा मृतक के साथ जो हुआ है वह दूसरों के साथ भी हुआ होगा।

अदालत ने कहा चोट की प्रकृति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यह हिरासत में हिंसा का मामला है... यह बड़ी बात है कि यह हिरासत में हुई हिंसा का मामला है और यह किसने किया है यह भी बहुत स्पष्ट है।
विज्ञापन

गुर्जर की जेल में 4 अगस्त को मौत हो गई थी और उसके शव पर गंभीर चोटों के निशान थे।

याचिका में परिवार ने आरोप लगाया कि गुर्जर को जेल अधिकारियों द्वारा परेशान किया जा रहा था क्योंकि वह पैसे की उनकी नियमित रूप से बढ़ती मांगों को पूरा करने में असमर्थ था और पूर्व नियोजित साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी गई थी।
याची के अधिवक्ता महमूद प्राचा ने कहा कि पुलिस उचित प्रक्रिया में जांच नहीं कर रही है क्योंकि जेल में स्थापित सीसीटीवी की डीवीआर अभी तक बरामद नहीं किए गए। जेल अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से पैसे की जबरन वसूली के पहलू को नहीं देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर की गई स्थिति रिपोर्ट और यहां दायर की गई स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि चोट मामूली चोट है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम से पता चलता है कि 12 गंभीर चोट के निशान मिले है। हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को इस याचिका पर दिल्ली व जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

उन्होंने कहा उनके मुवक्किल पर जेल अधीक्षक पर हमले का आरोप लगाया गया है, हो सकता है उसने अपराध किया हो, लेकिन जेल अधिकारी न केवल उसकी पिटाई करता है बल्कि सीसीटीवी बंद करवा देता है। उन्होंने कहा जेल अधीक्षक पर यदि हमला हुआ तो उसकी मेडीकल रिपोर्ट होनी चाहिए, यह मात्र विभागीय कार्रवाई का मामला नहीं है। एक व्यक्ति ने अपना जीवन खो दिया और उसके शरीर पर 12 चोटों से पता चलता है कि यह हिरासत का मामला है।

परिवार ने आरोप लगाया है कि तिहाड़ में जेल अधिकारी एक संगठित जबरन वसूली सिंडिकेट चला रहे हैं और पुलिस अपराधियों को बचाने और बचाने के लिए जांच में हेरफेर करने की कोशिश कर रही है।
जेल प्रशासन ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि उपाधीक्षक सहित चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और आठ अन्य को केंद्रीय जेल नंबर 3 से स्थानांतरित कर दिया गया है और अगले आदेश तक अधीक्षक को पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने कहा कि चश्मदीदों के बयान के अनुसार, 30-35 लोग मृतक की पिटाई करने के लिए डंडे लेकर आए थे और जेल प्रशासन के अनुसार तकनीकी समस्या के कारण सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय लेनदेन के पहलू पर गौर किया जा रहा है और आगे की जांच के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया जाए।
पुलिस की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार 28 गवाहों से पूछताछ की गई है और धारा 302/34 (हत्या) के तहत मामले में अब मारपीट व गलत तरीके से रोकने की भी धारा जोड़ दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें