मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि वकील सीआर जया सुकिन की याचिका प्रचार हित याचिका (पीआईएल) है, जो अफवाहों और निराधार आरोपों एवं अनुमानों पर आधारित है।
उच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल बंद करने और देश में आगामी चुनावों में फिर से मत पत्रों (बैलट पेपर) का प्रयोग करने का निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को प्रचार पाने के लिए दायर बताते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि वकील सीआर जया सुकिन की याचिका प्रचार हित याचिका (पीआईएल) है, जो अफवाहों और निराधार आरोपों एवं अनुमानों पर आधारित है। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता ने ईवीएम के कामकाज पर ठोस रूप से कुछ भी तर्क नहीं दिये। ऐसे में हमें याचिका पर सुनवाई करने का कोई कारण नहीं दिखता।
पीठ ने कहा याचिका चार दस्तावेजों पर आधारित थी, जिनमें से एक कोई खबर थी और अन्य उच्चतम न्यायालय के समक्ष उसके ज्ञापन एवं याचिका से संबंधित थे। याची को खुद ईवीएम के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता ने खबर पढ़ी और ईवीएम और उसके काम-काज को देखे बिना याचिका दाखिल कर दी। जबकि इसे निर्वाचन आयोग के साथ-साथ संसद की भी स्वीकृति प्राप्त है।
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फिलहाल अदालत ने याची को पूरे मुद्दे पर शोध करने और उचित तर्कों के साथ नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी, लेकिन बिना कोई ठोस आधार पर तर्को के याचिका दायर करने पर उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया। अदालत ने याची को जुर्माने की राशि चार सप्ताह में दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पास जमा करवाने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की तरफ से पेश अधिवक्ता सिद्धांत कुमार ने कहा कि देश की कई अदालतें पहले ही इस पर गौर कर चुकी हैं और मुद्दे पर फैसला दे चुकी हैं। अभी तक ईवीएम के खिलाफ किसी भी अदालत ने आदेश नहीं दिया है। ऐसे में याचिका खारिज कर याची पर जुर्माना लगाया जाय।