फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली : स्वास्थ्य सेक्टर को लगे पंख, दो साल में भरी दस साल की उड़ान

Wed, 09 Mar 2022 03:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

हर लहर से सीखती रही राजधानी, 10 वर्ष बाद महामारी काल में मिले दो बड़े अस्पताल।
विज्ञापन
demo pic - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना महामारी के दौरान राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य सेक्टर को पंख लग गए हैं। करीब दस साल बाद राजधानी को दो सुपर स्पेशिलिटी अस्पतालों की सौगात मिली। वहीं, अस्पतालों में बिस्तर, वेंटिलेटर, आईसीयू के साथ-साथ तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा है। टीकाकरण के जरिये जिला स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हुईं। इसके साथ कोरोना ने दिल्ली को आनुवांशिक जांच क्षमता से पहचान कराई।

विज्ञापन


बीते सप्ताह दिल्ली में कोरोना महामारी के पूरे हुए दो वर्ष को लेकर जब ‘अमर उजाला’ ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आए बदलावों पर जानकारी एकत्रित की तो पता चला कि साल 2020 से अब तक दिल्ली ने संक्रमण की हरेक लहर से सीख लेते हुए आगे की रणनीति को न सिर्फ बदला, बल्कि अस्पतालों से लेकर जांच, उपचार व निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो महामारी की वजह से दिल्ली के स्वास्थ्य सेक्टर में जितना विकास बीते नौ से 10 साल में नहीं हुआ, उतना साल 2020 से अब तक किए जा चुका है। द्वारका में इंदिरा गांधी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल और बुराड़ी क्षेत्र में डॉ. अंबेडकर सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल शुरू होने से दिल्ली के उन लाखों लोगों को लाभ मिला है जिन्हें 20 से 30 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद लोकनायक या फिर डीडीयू और रोहिणी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल तक जाना पड़ता था।
विज्ञापन


कोरोना ने आनुवांशिक जांच क्षमता से कराई पहचान  लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि चिकित्सीय क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर आनुवांशिक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं विकसित करना चर्चा का विषय रहा है। इस बारे में काफी बातें हुईं, लेकिन पहली बार कोरोना महामारी से उन्हें एहसास हुआ कि यह सुविधा दिल्ली के अस्पतालों में भी विकसित हो सकती है। सरकार से मिले सहयोग के जरिये दिल्ली में एक नहीं बल्कि लोकनायक और आईएलबीएस दो अस्पतालों में जीनोम सीक्वेसिंग शुरू हुई। अब तक यहां एक हजार से भी अधिक नमूनों की जांच हो चुकी है।

निर्माणाधीन अस्पतालों पर ध्यान बढ़ाया
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, साल 2015 से 2019 के बीच दिल्ली में एक भी नया अस्पताल शुरू नहीं हुआ। इस दौरान आठ अस्पतालों का अलग- अलग इलाकों में निर्माण कार्य चलता रहा, जिनकी नींव करीब साल 2012-13 के दौरान रखी गई थी, लेकिन साल 2020 में तीन-तीन बार संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण जब दिल्ली के अस्पतालों में बिस्तरों का संकट शुरू हुआ तो सरकार ने निर्माणाधीन अस्पतालों पर ध्यान बढ़ाया और कुछ ही महीने के भीतर दो बड़े सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल शुरू हुए, जहां साल 2021 से मरीजों का उपचार चल रहा है।

वेंटिलेटर, आईसीयू और बिस्तर तक बढ़े
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि साल 2016 में लोकनायक अस्पताल में जब वेंटिलेटर कम होने के अभाव में तीमारदारों को अंबू बैग के सहारे अपने मरीज को सांस देने का मुद्दा खड़ा हुआ उस दौरान दिल्ली सरकार ने 125 नए वेंटिलेटर की खरीद की। इन्हें कई अस्पतालों को दिया गया लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने से यह नाकाफी रहे, तब से लेकर साल 2020 तक दिल्ली के पास सीमित वेंटिलेटर ही उपलब्ध थे, लेकिन अब इनकी संख्या 17 हजार भी पार कर गई है, जो बीते वर्षों की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। अस्पतालों में बिस्तरों की क्षमता 15 हजार से अधिक हुई है और आईसीयू बिस्तर भी अब 10 हजार के करीब पहुंच रहे हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का है रिकॉर्ड उपलब्ध
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महामारी के दौरान ही दिल्ली में कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम पिछले वर्ष 16 जनवरी से शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के तहत सभी 11 जिला स्वास्थ्य टीमों को जब जिम्मेदारी सौंपी गई तो यह न सिर्फ सक्रिय हुईं बल्कि एक वर्ष से भी कम समय में इन्होंने एकल खुराक का 100 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया। घर-घर जाकर लोगों को वैक्सीन लगाने वाली इन टीमों के पास फिलहाल राजधानी के प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है जिनमें पहचान के अलावा मोबाइल फोन इत्यादि की जानकारी है। इस रिकार्ड का इस्तेमाल भविष्य में स्वास्थ्य नीतियों को लेकर भी किया जा सकता है।

भविष्य में और भी सौगात देने की तैयारी
दिल्ली के स्वास्थ्य विकास की रफ्तार अभी भी जारी है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दिल्ली वाले भविष्य में और भी स्वास्थ्य सौगातें लेने को तैयार रहें। जल्द ही सात बड़े अस्पताल अगले दो वर्ष में मिलने जा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति के पास उसका अपना हेल्थ ई-कार्ड इसी वर्ष से उपलब्ध होगा।

वहीं पुराने अस्पतालों में मरीजों की वेटिंग खत्म करने के लिए उन्हें विस्तार भी दिया जा रहा है। साल 2024 तक लोकनायक से लेकर जीटीबी अस्पताल तक में मरीजों को नए-नए ब्लॉक और इमारतें दिखाई देने लगेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें