नई दिल्ली। पुलिस की स्पेशल सेल ने जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के पूर्व सदस्य और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता त्रिलोचन सिंह वजीर की गोली मारकर हत्या करने के मुख्य आरोपी हरमीत सिंह (56) को रविवार को जम्मू से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक पिस्टल बरामद की गई है। ट्रांसपोर्टर हरमीत ने पुलिस को बताया कि उसने त्रिलोचन सिंह की हत्या हरप्रीत के कहने पर की थी। इस हत्याकांड में इससे पहले राजेंद्र चौधरी उर्फ राजू गंजा (33) और बलविंदर सिंह उर्फ बिल्ला (67) गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस ने फेसबुक पर डाला सुसाइड नोट भी बरामद कर लिया।
त्रिलोचन सिंह का शव मोती नगर के बसई दारापुर स्थित एक मकान के बाथरूम में सड़ी-गली अवस्था में नौ सितंबर को मिला था। मोती नगर थाने से लेकर जांच अपराध शाखा को सौंपी गई थी। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण दिल्ली पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में थीं।
एसीपी जसबीर सिंह की देखरेख में नौ सितंबर को जम्मू भेजी गई टीम ने दस दिन की कड़ी मेहनत के बाद हरमीत सिंह की गतिविधियों का पता लगाया। 19 सितंबर को सूचना मिली कि हरमीत सिंह किसी साथी से मिलकर छिपने की जगह ढूंढने के लिए जम्मू बॉर्डर पर आएगा।
दिल्ली पुलिस की टीम ने घेराबंदी कर रविवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे हरमीत सिंह को पकड़ लिया। इसके कब्जे से एक स्वचालित पिस्टल व एक कारतूस बरामद किया गया है। पुलिस अब जांच कर रही है कि क्या इसी पिस्टल का इस्तेमाल त्रिलोचन सिंह की हत्या के लिए किया गया था।
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हरमीत सिंह के कब्जे से वह सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया है, जो उसने 11 सितंबर को फेसबुक पर डाला था। इस नोट में उसने लिखा था कि त्रिलोचन सिंह की हत्या उसने की है। उसने कमरे में हरप्रीत के साथ बातचीत करते हुए त्रिलोचन को कहते सुना कि वह उसके बेटे की हत्या करा देंगे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पर उनका राज होगा।
यह सुनकर उसको गुस्सा आ गया और उसने गोली मारकर त्रिलोचन की हत्या कर दी थी। हालांकि शुुरुआती पूछताछ में उसने बताया था कि त्रिलोचन सिंह की हत्या उसने हरप्रीत के कहने पर की थी। अब हरप्रीत के गिरफ्तार होने के बाद ही पूरी साजिश का खुलासा होगा।
दिल्ली पुलिस को जांच में यह भी पता लगा है कि आरोपी दो-तीन महीने से त्रिलोचन सिंह की हत्या की साजिश रच रहे थे। इन्होंने ‘दृश्यम’ फिल्म देखकर साजिश रची थी और फिल्म की तरह ही पुलिस को गुमराह करना चाहते थे। वे त्रिलोचन के शव को मेट्रो स्टेशन या फिर आईजीआई एयरपोर्ट पर फेंकना चाहते थे।