नई दिल्ली। दिल्ली सरकार पौधरोपण के साथ वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। असोला भाटी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में 2 अक्तूबर से वन्यजीव संरक्षण जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। वन्यजीवों का प्रकृति के संतुलन में योगदान को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। दावा किया कि पिछले 7 साल में दिल्ली सरकार द्वारा 1.70 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। इस साल अभी तक 22 लाख से अधिक पौधे लगाए हैं।
वन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार दिल्ली मैदानी राज्यों की श्रेणी में आता है। पहाड़ी राज्यों में 60 फीसदी ग्रीन बेल्ट होनी चाहिए, जबकि मैदानी इलाकों में उस राज्य के कुल क्षेत्रफल का 20 फीसदी ग्रीन क्षेत्र होना चाहिए। मैदानी राज्य के मापदंड के हिसाब से दिल्ली ने 20 फीसदी के लक्ष्य को हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि 2019 की फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 21.88 ग्रीन कवर क्षेत्र विकसित हो चुका है। दिल्ली का कुल क्षेत्रफल की 1483 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से 2019 में ग्रीन कवर 325 वर्ग किमी में विकसित हो चुका है। ग्रीन क्षेत्र के विकास क्रम को देखेंगे तो 2015 में ग्रीन कवर 299 वर्ग किमी था, जो करीब 20.2 फीसदी था। 2017 में यह बढ़कर 305 वर्ग किमी हो गया, जो 20.5 9 फीसदी हो गया। 2019 में यह बढ़कर 325 वर्ग किमी हुआ, जो 21.88 फीसदी हो गया। दिल्ली में 2015 में जो ग्रीन कवर था उसमें अभी तक करीब 2500 हेक्टेयर ग्रीन कवर की बढ़ोतरी हुई है।
थर्ड पार्टी कर रही है ऑडिट
गोपाल राय ने कहा कि सभी विभागों का अलग-अलग एजेंसियों से थर्ड पार्टी ऑडिट का काम चल रहा है। एक महीने में सभी की प्राइमरी रिपोर्ट विभाग सौंपेंगे। इससे अंदाजा लगेगा कि जो पौधे लगाए गए हैं उनमें से कितने फीसदी, किस क्षेत्र में जीवित हैं। अभी वन विभाग को फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने एक प्राइमरी रिपोर्ट भेजी है। इसमें किसी भी एरिया में 90 फीसदी सक्सेस रेट है और किसी एरिया में 65 फीसदी है। इसके अलावा किसी क्षेत्र में 50 से भी कम सर्वाइवल रेट है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि ग्रीन बेल्ट के साथ-साथ जो वन्यजीव हैं उनका प्रकृति संतुलन में काफी योगदान होता है। इंसान जो प्रदूषण पैदा करता है उसमें से बहुत सारे प्रदूषण को पौधे सोख लेते हैं। बहुत सारे प्रदूषण को वन्यजीव की चैन खत्म करती है। प्रकृति ने जो सिस्टम बनाया वो धीरे-धीरे टूट रहा है। प्राकृतिक संतुलन बना रहे, इसलिए दिल्ली वन विभाग की तरफ से 2 से 8 अक्तूबर तक एक सप्ताह का वन्यजीव संरक्षण जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत असोला भाटी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित होंगे।
इस साल 33 लाख पौधा लगाने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने इस साल 33 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा है। अभी तक 22 लाख 32 हजार पौधे रोपे जा चुके हैं। कार्यक्रम में डीडीए एनडीएमसी, लोक निर्माण विभाग, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, शिक्षा विभाग, पूर्वी दिल्ली नगर निगम, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, उत्तरी दिल्ली नगर निगम, डीआईआईडीसी सहित 19 विभागों ने योगदान दिया।
प्रदूषण के खिलाफ अभियान
दिल्ली सरकार ने करीब 1.70 करोड़ पौधे रोपे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 में 16.51 लाख, 2016-17 में 24.75, लाख, 2017-18 में 16 लाख, 2018-19 में 28 लाख, 2019-20 में 28.95 हजार पौधे रोपे गए। केजरीवाल सरकार के पिछले पांच साल के कार्यकाल में 1.15 करोड़ पौधे लगाए। पिछले 7 साल में सरकार द्वारा 1.70 करोड पौधे रोपे गए। बड़े स्तर पर पौधरोपण से प्रदूषण को भी मात दी गई।
प्लांटेशन ऑडिट कराए सरकार : भाजपा
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रवीध शंकर कपूर ने गोपाल राय के दावे को अविश्वसनीय बताया है। कहा कि दिल्ली सरकार इस दावे पर प्लांटेशन ऑडिट कराए। प्लांटेशन आडिट रिपोर्ट पेश नहीं करना साफ दर्शाता है कि सरकार जानती है कि जिस संख्या में पौधे लगाने के दावे हो रहे हैं उतने पौधे रोपे ही नहीं हैं। प्लांटेशन ड्राइव के नाम पर हर वर्ष करोड़ों का बजट बनता है, जिसमें से अधिकांश हेराफेरी की भेंट चढ़ जाता है।