उन्होंने आगे बताया कि सीएसई ने केंद्र के एप सफर द्वारा उपलब्ध कराए गए डाटा को विश्लेषण किया और विश्लेषण के आधार पर सीएसई ने रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट कहती है कि 31 फीसदी प्रदूषण दिल्ली के अंदर का है और 69 फीसदी प्रदूषण दिल्ली के बाहर का है। दिल्ली के अंदर बाहर से 69 फीसदी प्रदूषण आ रहा है। सफर के डाटा का विश्लेषण कर सीएसई की ओर से जारी रिपोर्ट 2016 के टेरी की तरफ से जारी डाटा से मेल खाती है।
गोपाल राय ने कहा कि टेरी के डाटा में दिल्ली का प्रदूषण 36 फीसदी था और आज यह घट कर 31 फीसदी हो गया है। दिल्ली के अंदर जो बाहर से प्रदूषण आता था वह पहले 64 फीसदी था, जो कि सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार बढ़कर 69 फीसदी हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय 14 फीसदी बायोमॉस बर्निंग का प्रदूषण था। उसके बाद से लगातार पराली की घटनाएं बढ़ी हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी बुधवार को केंद्र ने इस बात को स्वीकार किया कि कोर्ट में दिया गया चार फीसदी का डाटा पूरे साल का डाटा है। इस समय प्रदूषण में पराली का योगदान करीब 35 से 40 फीसदी है।
गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से दिल्ली-एनसीआर से जुड़े सभी पर्यावरण मंत्रियों की बैठक बुलाने का निवेदन किया है, जिससे डाटा के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से संयुक्त कार्य योजना बन सके। उन्होंने कहा कि कार्य योजना में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व राजस्थान को अपने द्वारा किए जाने वाले कार्यों को सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही जिम्मेदारी तय की जाए कि यदि कोई राज्य कार्य योजना को लागू नहीं कर रहा है तो राज्य पर कार्रवाई करने के लिए नीति बनाई जाए।