बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन से संबंधित विशिष्ट कार्यों की देखरेख और प्रबंधन के लिए 60 डीसीपी का मसौदा तैयार किया गया है, जिसमें शिखर सम्मेलन स्थल, आईजीआई हवाई अड्डे, नामित होटलों, दौरा करने वाले प्रतिनिधिमंडल की यात्राओं के लिए नामित स्थलों और यातायात मार्गों के आसपास सुरक्षा शामिल है। एक-एक डीसीपी को प्रतिनिधियों के आवास वाले सभी होटलों, उन स्थानों जहां बैठकें आयोजित की जाएंगी और उन स्थानों की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। डीसीपी को इस्तेमाल होने वाले मार्गों का भी प्रभारी बनाया गया है।
यह दिए निर्देश
- महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों की सुरक्षा
- प्रतिनिधियों, पर्यटकों और जनता के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार
- गैरकानूनी सभाओं की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी
- सभी सीमाओं को सील करना, अपराध पर नियंत्रण
- कुख्यात तत्वों को चेतावनी और नियंत्रण में रखना
- अफवाह फैलाने वाले और भड़काने वाली पोस्ट को रोकना
- क्यूआरटी/कमांडो इकाइयों और विशेष वाहनों के साथ स्ट्राइक फोर्स
- जलभराव से निपटने के लिए आकस्मिक योजना
सम्मेलन के दौरान भारी वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए तय स्थानों के लिए आकस्मिक योजना बनाई गई है। बुधवार देर रात उपराज्यपाल ने चयनित जगहों का दौरा किया। सक्सेना ने भैरो मार्ग पर प्रगति मैदान गेट नंबर-5 से राजघाट तक पूरे रास्ते का दौरा किया और बाढ़ को रोकने के लिए व्यवस्थाओं के कामकाज की समीक्षा की।
इससे पूर्व उन्होंने आईटीपीओ, राजघाट, प्रतिनिधियों के लिए नामित होटलों और अन्य रणनीतिक स्थानों के आसपास जलभराव से निपटने के लिए आकस्मिक योजना बनाने का निर्देश दिया था। योजना में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पानी को साफ करने के लिए ट्रैक्टर पर लगे 50 एचपी के हेवी ड्यूटी पंप लगाना शामिल है। यह मैकेनिकल रोड स्वीपिंग (एमआरएस) वाहनों के अतिरिक्त हैं, जिसमें सड़कों के किनारे जमा कीचड़/गाद को साफ करने के लिए मशीनें और बंद नालियों व सीवर लाइनों को साफ करने के लिए एक सुपर सकर भी लगाया जाता है।