धुएं के गुबार में फंसे लोग जीवन बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, लेकिन किसी को कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। उधर, मौत हर किसी का पीछा कर रही थी। कई खुशकिस्मत लोगों ने मौत को चकमा भी दिया और सही सलामत बाहर आ गए, परंतु कुछ बदनसीब ऐसे भी थे जो खुद का जीवन नहीं बचा पाए। हालात इतने भयावह थे कि आसपास के लोग मंजर देखकर बेहाल थे। चीख-पुकार सुनकर उनके रोंगटे खड़े हो रहे थे।.
मुंडका में शुक्रवार शाम तपती गर्मी के बीच आग कहर बनकर बरसी। धुएं के गुबार में फंसे लोग जीवन बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, लेकिन किसी को कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। उधर, मौत हर किसी का पीछा कर रही थी। कई खुशकिस्मत लोगों ने मौत को चकमा भी दिया और सही सलामत बाहर आ गए, परंतु कुछ बदनसीब ऐसे भी थे जो खुद का जीवन नहीं बचा पाए। हालात इतने भयावह थे कि आसपास के लोग मंजर देखकर बेहाल थे। चीख-पुकार सुनकर उनके रोंगटे खड़े हो रहे थे।
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उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर के रहने वाले प्रवीण आग लगने वाली इमारत में काम करते थे। घटना के बाद से प्रवीण का कोई अता-पता नहीं है। वह अपने दो भाइयों पवन और पंकज के अलावा पत्नी और दो जुड़वां बेटियों के साथ रहते थे। परिवार वालों ने बताया इस कंपनी में तीन सौ लोग काम करते थे। यहां सीसीटीवी कैमरा, वाईफाई का कवर और तार का काम होता था।
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इसी तरह रेणू भी घटना के बाद से गायब है। उसका देवर इमारत के पास भीड़ देखकर रुक गया और अपनी भाभी के बारे में जानकारी हासिल करने लगा। लेकिन न तो घटनास्थल और न ही अस्पताल से कोई जानकारी मिल पाई। वहीं नांगलोई की रहने वाली मुस्कान के चाचा इस्लामुद्दीन ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वह अपनी बच्ची की तलाश में पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि आग लगने के बाद उसकी भतीजी अन्य लड़कियों के साथ इमारत की पिछली दीवार के पास से नीचे कूद गई थी।
50% से ज्यादा झुलसे लोग एम्स-सफदरजंग में शिफ्ट
आग में घायलों को देर रात एम्स और सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया। जानकारी मिली है कि घायलों में कुछ 50 फीसदी से अधिक झुलसे हैं जिनका उपचार बड़े अस्पताल में हो सकता है। एम्स और सफदरजंग अस्पताल के पास दो बड़ी बर्न यूनिट हैं। इसलिए घायलों को वहां भेजा गया है।
जानकारी यह भी मिली है कि मुंडका आग में देर रात तक घायलों को पांच अस्पतालों में भर्ती किया गया है। इनमें एम्स और सफदरजंग के अलावा डीडीयू अस्पताल, संजय गांधी और रोहिणी स्थित अंबेडकर अस्पताल शामिल है। सफदरजंग अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार उनके यहां देर रात एक 26 वर्षीय युवक को लाया गया है जिसकी हालत गंभीर है। यह काफी झुलस गया है।
नई दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल पहुंचे मुंडका निवासी किशन ने बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी हैं। उनकी पत्नी गीता गोदाम में आरओ पैक करने का काम करती थी। घटना के बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है। उनके साथ एक महिला जया हैं जो अपनी तीन बहन प्रीति, अनु और मधु की तलाश में है।