दिल्ली में 10 से लेकर 20 जनवरी के बीच नए मामलों की संख्या 20 हजार से अधिक पहुंच गई थी। वहीं, जनवरी के अंतिम सप्ताह में नए मामले पांच हजार से नीचे पहुंच गए थे। फरवरी के पहले सप्ताह में यह तीन हजार के आसपास व दूसरे सप्ताह में एक हजार और तीसरे सप्ताह में एक हजार से भी कम दर्ज किए गए हैं।
राजधानी में कोरोना की गिरती संक्रमण दर के साथ अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भी तेजी से गिरावट आ रही है। यही वजह है कि दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों का दावा है कि ताजा स्थिति को देखते हुए दिल्ली में कोरोना को लेकर हालात नियंत्रण में आ रहे हैं और महामारी कम हो रही है। हालांकि, डॉक्टरों ने चेताया है कि लापरवाही को दूर कर लोगों को अभी भी सजग रहने की जरूरत है।
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दिल्ली में 10 से लेकर 20 जनवरी के बीच नए मामलों की संख्या 20 हजार से अधिक पहुंच गई थी। वहीं, जनवरी के अंतिम सप्ताह में नए मामले पांच हजार से नीचे पहुंच गए थे। फरवरी के पहले सप्ताह में यह तीन हजार के आसपास व दूसरे सप्ताह में एक हजार और तीसरे सप्ताह में एक हजार से भी कम दर्ज किए गए हैं। साथ ही संक्रमण दर में भी गिरावट दर्ज हो रही है। यदि संक्रमण दर के आंकड़ों पर गौर करें तो बीती 31 जनवरी को दिल्ली में 6.20 फीसदी संक्रमण दर थी। एक फरवरी को संक्रमण दर कम होकर 5.09 फीसदी पर पहुंच गई थी। पांच फरवरी तक संक्रमण दर 2.87 फीसदी पर थी। 10 फरवरी तक संक्रमण दर 2.09 फीसदी व 11 फरवरी को संक्रमण दर का ग्राफ दो फीसदी से नीचे पहुंच 1.73 फीसदी तक लुढ़का था। एक दिन पहले संक्रमण दर 1.52 फीसदी दर्ज की गई है।
दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार के मुताबिक, पहले जहां औसतन हर रोज दो से तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा था। अब यह संख्या घटकर सप्ताह भर में दो से तीन हो गई है। साथ ही ओपीडी में भी कोरोना मरीजों की संख्या न के बराबर हो रही है। हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि हम लोगों के बीच ही मौजूद है। भविष्य में कोरोना संक्रमण के परिवर्तन भी होंगे, लेकिन क्रॉस इम्यूनिटी भी बनती रहेगी। राहत की बात यह हो सकती है कि पहले की तरह अब मरीजों की हालत गंभीर श्रेणी में नहीं पहुंचे। इस समय अस्पताल में कोरोना के 20 से भी कम मरीजों का इलाज चल रहा है।
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आकाश हेल्थकेयर से डॉक्टर अक्षय बुद्धराजा ने कहा कि अस्पताल में कोरोना के सिर्फ चार मरीज भर्ती हैं, जबकि इससे पहले प्रतिदिन दो से तीन मरीजों को भर्ती किया जा रहा था। अब यह संख्या सप्ताह भर के लिए हो गई है। साथ ही पहले के मुकाबले कोरोना को लेकर आने वाले फोन की संख्या भी कम हो गई है। इससे साफ है कि संक्रमण का ग्राफ अस्पतालों में ही नहीं बल्कि घरों में भी गिर रहा है। बीएलके सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टर संदीप नय्यर के मुताबिक, अस्पताल में सिर्फ दो से चार मरीज ही भर्ती हैं। यह मरीज अस्पताल में किसी अन्य बीमारी के इलाज के लिए पहुंचे थे। लेकिन, परीक्षण करने पर वे पॉजीटिव मिले।