अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों को अब इलाज के लिए न तो लंबा इंतजार करना होगा और न खाना, दवाइयों अथवा खून के लिए अब सड़कों पर जाम से जूझना होगा। ड्रोन से अस्पताल में भर्ती मरीजों को खाना, दवाई और जरूरतमंदों को खून भी मुहैया कराया जाएगा। इससे कई गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ट्रायल के तौर पर द्वारका के अस्पतालों के साथ साथ जरूरतमंदों को खाना और दवाई मुहैया की गईं।
प्रगति मैदान में नागरिक सुरक्षा और अग्निशमन उपकरणों की तीन दिवसीय एक्सपो में ड्रोन बनाने वाली कंपनी टर्बो के गगनदीप सिंह ने बताया कि इसके लिए सभी तैयारी हो चुकी है। वर्ल्ड यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) फेडरेशन (भारत) के अध्यक्ष इकबाल सिंह जगदेवा ने बताया कि ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा के साथ साथ नागरिक सुविधाओं के लिए भी किया जाएगा। कोविड-19 संक्रमण काल में द्वारका के एक निजी अस्पताल में अलग अलग फ्लोर पर ड्रोन की मदद से खाना और दवाईयां पहुंचाई गई। कमांड के मुताबिक वार्ड नंबर तक पहुंचाने में सक्षम ड्रोन की कीमत भले ही अधिक होगी, मगर जिंदगी से ज्यादा नहीं।
ड्रोन बनाने वाली कंपनी के केएम जगदीश ने कहा कि इसके लिए तैयारियां हैं। कमांड के मुताबिक किसी भी फ्लोर पर दवाईयां खिड़कियों और रैंप से उपरी मंजिलों में भेजी जा सकती हैं। ट्रायल में मिली सफलता के बाद ब्लड बैंक से अस्पतालों तक गंभीर मरीजों के लिए रक्त की कमी को ड्रोन के जरिये दूर किया जाएगा। ब्लड बैंक से जरूरत के मुताबिक यूनिट मंगवाए जाएंगे। ड्रोन के इस्तेमाल से न तो इंतजार करना होगा और न ही जाम से जूझना पड़ेगा।
ड्रोन से किया जा रहा है कीटनाशक का छिड़काव भी
स्टॉर्ट अप से शुरुआत करने वाली कंपनी के डायरेक्टर अभिषेक और पवन दूबे ने बताया कि उन्होंने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है। इसका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक के छिड़काव के लिए किया जा चुका है। एक ड्रोन करीब 45 मिनट तक तीन किलोमीटर के दायरे में इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसके साथ रोबोट का भी इस्तेमाल करने पर सहूलियतें और भी बढ़ जाएंगी। फिलहाल देश की रक्षा सेवाओं में भी इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।