जल निकासी के मामले पर सीएम और डीप्टी सीएम के साथ बैठक करते एलजी।
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दिल्ली सरकार राजधानी के नालों, ढलान और जल ग्रहण क्षेत्र पर विस्तृत अध्ययन कराएगी। इसका मकसद बारिश के पानी को निचले इलाकों में प्राकृतिक और कृत्रिम गड्ढ़ों में इकट्ठा करना है। इकट्ठा किए गए बारिश के पानी का बाद में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा। उपराज्यपाल कार्यालय में बुधवार एलजी वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच बैठक में इस पर सहमति बनी है।
उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इसकी संभावना का पता लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही बारिश के पानी की निकासी के लिए अलग से पाइपलाइन डालने की समयबद्ध योजना तैयार करने को कहा है। बैठक में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत दिल्ली सरकार, एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान नालों की सफाई के काम पर भी चर्चा हुई।
उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करें। आपदा प्रबंधन मोड में काम करने से यह समस्या खत्म नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वह नालों की सफाई करने के तुरंत बाद मलबा मौके से हटा लें। इसकी फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाकर संबंधित एजेंसियां अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दें। एलजी और सीएम ने अधिकारियों से कहा कि मलबा साफ करते वक्त पानी का दबाव तेज रखें। इससे नाले के निचले हिस्से में गाद नहीं जमेगी। इसी तरह बारिश के दौरान सड़कों के बड़े व छोटे गड्ढे को भी तुरंत भरा जाना है।
जलभराव क्षेत्र में बनाए जाएंगे छोटे-छोटे गड्ढ़े
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल भराव वाले क्षेत्रों में सड़कों व ड्रेन के नजदीक छोटे व गहरे गड्ढे बनाएं। इनका व्यास 6-8 इंच के बीच रखना है। छिद्रयुक्त मोटी-मोटी प्लेट से इन गड्ढों को ढंक देना है। इससे जमा होने पर पानी जमीन के अंदर जाता रहेगा। इसका इस्तेमाल भूजल का स्तर बढ़ाने में होगा। इससे सहमति जताते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इस दिशा में काम करने का कहा है। उपराज्यपाल ने जोर दिया कि बारिश के दौरान सभी अधिकारियों को हर वक्त तैयार रहना है। उन्होंने क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) बनाने का कहा।